गिरिडीह: गिरिडीह नगर निगम में विकास कार्यों को लेकर विवाद सामने आया है। तीन वार्ड पार्षदों ने नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए महापौर और उपमहापौर पर विकास कार्यों में भेदभाव करने का आरोप लगाया है। वार्ड पार्षद संजीव सिंह गुड्डू, दीपक यादव और वार्ड पार्षद प्रतिनिधि मिथुन चन्दरवांसी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने-अपने वार्ड की समस्याओं को उठाया और निष्पक्ष तरीके से विकास कार्य कराने की मांग की।

वार्डों में विकास कार्य नहीं होने का आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्षदों ने आरोप लगाया कि उनके वार्डों में अपेक्षित विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं। उनका कहना है कि महापौर और उपमहापौर की ओर से कथित तौर पर अपने करीबी लोगों को काम दिया जा रहा है, जबकि आम जनता की समस्याओं की अनदेखी हो रही है।

पार्षदों ने कहा कि जनता ने उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों के विकास और नागरिक समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके बावजूद नगर निगम में उनकी मांगों और समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

पानी की समस्या को लेकर उठाए सवाल

पार्षदों ने गिरिडीह शहर में पानी की समस्या का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पेयजल शहर की प्रमुख बुनियादी समस्याओं में शामिल है, लेकिन लोगों को इससे नियमित राहत नहीं मिल पा रही है।

उनका सवाल था कि जब पानी जैसी आवश्यक समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है, तो अन्य विकास कार्यों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने नगर निगम से नागरिकों की बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता देने की मांग की।

भाजपा विचारधारा के कारण भेदभाव का आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्षदों ने आरोप लगाया कि उनकी विचारधारा भाजपा से जुड़ी होने के कारण उनके वार्डों में विकास कार्यों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में राजनीतिक विचारधारा के बजाय जनहित को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और सभी वार्डों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।

निष्पक्ष विकास कार्य कराने की मांग

तीनों जनप्रतिनिधियों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए अपने वार्डों की समस्याओं के समाधान और विकास योजनाओं के निष्पक्ष क्रियान्वयन की मांग की।

महापौर और उपमहापौर पर लगाए गए आरोपों के संबंध में उनका पक्ष फिलहाल सामने नहीं आया है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकी है।