गुमला घाघरा प्रखंड मुख्यालय स्थित पुराने पेट्रोल पंप से आगे एनएच-143A मुख्य सड़क पर सड़क हादसे में दो युवकों की मौत के बाद ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। पोस्टमार्टम के बाद करीब दोपहर 3 बजे मृतकों के परिजनों और सैकड़ों स्थानीय ग्रामीणों ने दोनों शवों के साथ घटनास्थल पर सड़क जाम कर दिया। सड़क जाम में बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष शामिल हुए। इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन प्रभावित हो गया।

गौरतलब है कि बीती रात करीब 9:30 बजे दो युवक सड़क पर खड़े डस्ट लदे खराब ट्रैक्टर से टकरा गए थे। हादसा इतना भीषण था कि दोनों युवकों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से ही स्थानीय लोगों में नाराजगी थी।

खराब ट्रैक्टर सड़क पर खड़ा रहने को लेकर उठाए सवाल

सड़क जाम कर रहे ग्रामीणों ने स्थानीय पुलिस और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जब खराब ट्रैक्टर काफी समय से मुख्य सड़क पर खड़ा था, तो उसे किनारे क्यों नहीं कराया गया? ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि समय रहते ट्रैक्टर को सुरक्षित स्थान पर हटाया गया होता, तो संभवतः इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था।

लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं को लेकर भी ग्रामीणों में काफी आक्रोश देखा गया। प्रदर्शनकारियों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।

मौके पर पहुंचे थाना प्रभारी और प्रशासनिक अधिकारी

सड़क जाम की सूचना मिलने पर घाघरा थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उनके साथ लेबर इंस्पेक्टर और खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत की और स्थिति को समझने का प्रयास किया।

हालांकि, ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। समाचार लिखे जाने तक सड़क जाम जारी था और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई थीं। जाम के कारण यात्रियों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

मृतकों के परिजनों के लिए 50-50 लाख रुपये मुआवजे की मांग

ग्रामीणों ने सरकार से दोनों मृतकों के परिवारों को 50-50 लाख रुपये नकद मुआवजा देने की मांग की। इसके अलावा पीड़ित परिवारों को आवास उपलब्ध कराने और बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई।

प्रदर्शनकारियों ने दोनों मृतकों के परिजनों के लिए सरकारी नौकरी, घटना की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि पीड़ित परिवारों को उचित सहायता मिलनी चाहिए और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

फिलहाल, सड़क जाम और ग्रामीणों की मांगों को लेकर स्थिति बनी हुई थी। प्रशासन की ओर से मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है और यातायात कब सामान्य होता है, इस पर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।