रांची: झारखंड में JSSC-CGL समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कैबिनेट की ओर से परीक्षाएं रद्द करने का फैसला छात्रों को राहत देने के बजाय उन्हें भ्रमित करने की एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है।

मरांडी ने आरोप लगाया कि सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला छात्रों की मांगों को शांत करने के उद्देश्य से लिया है, जबकि छात्र लगातार पूरे मामले की CBI जांच की मांग कर रहे हैं।

‘परीक्षा रद्द कर छात्रों को ठगने की कोशिश’

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार का मौजूदा कदम छात्रों के हित में दिखाई देने के बावजूद इसके पीछे एक अलग रणनीति हो सकती है। उनका आरोप है कि सरकार परीक्षा रद्द करने के बाद कानूनी प्रक्रिया के जरिए इस पूरे मामले को उलझाने की कोशिश कर सकती है।

मरांडी ने दावा किया कि परीक्षा में कथित तौर पर गलत तरीके से चयनित अभ्यर्थी अदालत का रुख कर सकते हैं। इसके बाद अदालत सरकार और CID से परीक्षा रद्द करने के आधार और सबूत मांग सकती है।

‘CID गलत रिपोर्ट पेश करेगी और कोर्ट से मिल सकता है स्टे’

नेता प्रतिपक्ष ने आगे आरोप लगाया कि अदालत की ओर से सबूत मांगे जाने पर CID ऐसी रिपोर्ट पेश कर सकती है, जिसके आधार पर परीक्षा रद्द करने के फैसले पर ही सवाल खड़े हो जाएं।

मरांडी ने आशंका जताई कि इस पूरी प्रक्रिया का नतीजा परीक्षा रद्द करने के फैसले पर अदालत से स्टे के रूप में सामने आ सकता है।

हालांकि, यह बाबूलाल मरांडी का राजनीतिक आरोप और आशंका है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और सरकार या CID की ओर से इस आरोप पर प्रतिक्रिया इस खबर में उपलब्ध नहीं है।

छात्रों से अपील- ‘CBI जांच की मांग पर अडिग रहें’

बाबूलाल मरांडी ने आंदोलन कर रहे छात्रों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि छात्रों को केवल परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले से संतुष्ट नहीं होना चाहिए, बल्कि अपनी मूल मांग यानी निष्पक्ष CBI जांच पर कायम रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पूरे देश की नजर झारखंड के छात्रों के आंदोलन पर है और यह देखना जरूरी है कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच किस एजेंसी से और किस तरीके से कराई जाती है।

‘भाजपा छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी’

मरांडी ने कहा कि भाजपा राज्य के छात्रों के साथ खड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पूरे मामले में CBI जांच का आदेश नहीं दिया जाता, तब तक पार्टी छात्रों के साथ इस मुद्दे पर अपनी लड़ाई जारी रखेगी।

उनके बयान से साफ है कि विपक्ष अब परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले को अंतिम समाधान मानने के लिए तैयार नहीं है।

JSSC-CGL विवाद ने फिर पकड़ा सियासी जोर

JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर झारखंड में लंबे समय से छात्र आंदोलन चल रहा है। आंदोलनकारी छात्र परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

सरकार की ओर से परीक्षा रद्द करने की घोषणा के बाद अब एक नया सवाल खड़ा हो गया है, क्या परीक्षा रद्द करना ही छात्रों की समस्या का समाधान है या पूरे मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी है?

वहीं विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है कि कथित गड़बड़ियों की जांच CBI से कराई जाए। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच टकराव और बढ़ने के आसार हैं।

बड़ा सवाल यह है कि अगर परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो दोषियों तक पहुंचने के लिए कौन सी एजेंसी जांच करेगी? क्या केवल परीक्षा रद्द करने से उन अभ्यर्थियों को न्याय मिल पाएगा, जिन्होंने कथित तौर पर निष्पक्ष तरीके से परीक्षा दी थी?