छतरपुर पलामू जनसहयोग से पुनर्जीवित होगी ऐतिहासिक मंदेया नदी
छतरपुर पलामू नगर पंचायत क्षेत्र में वर्षों से
उपेक्षित पड़े परंपरागत जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण
और जनहितकारी पहल शुरू की गई है। ऐतिहासिक मंदेया
नदी को
पुनर्जीवित करने के लिए नगर पंचायत, समाजसेवियों जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों ने
मिलकर एक व्यापक अभियान छेड़ दिया है, जिसकी क्षेत्रभर में सराहना हो रही है।अभियान के तहत छतरपुर के
प्रतिष्ठित व्यवसायी एवं समाजसेवी रविशंकर
सिंह उर्फ बबुआ जी ने अपने निजी संसाधनों को जनहित में
उपलब्ध कराया है। उनके सहयोग से जेसीबी और पोकलेन मशीनों द्वारा नदी की सफाई गाद हटाने और
अतिक्रमण मुक्त करने का कार्य तेजी से किया जा रहा है।वहीं नगर
पंचायत अध्यक्ष अरविंद गुप्ता चुनमुन भी नगर पंचायत के वाहनों कर्मियों और अन्य
संसाधनों के साथ अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इस मुहिम में वार्ड
पार्षद दीपक कुमार वार्ड पार्षद प्रतिनिधि सेवक यादव पत्रकार एवं समाजसेवी मित्तल सिंह समेत
कई स्थानीय लोग भी बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। जनसहयोग से शुरू हुआ यह अभियान अब
जनआंदोलन का रूप लेने लगा है।नगर पंचायत अध्यक्ष अरविंद गुप्ता ने कहा कि किसी भी
क्षेत्र की नदियां और जल स्रोत उसके विकास की आधारशिला होते हैं। इनके संरक्षण से
भूजल स्तर में सुधार पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा
सुनिश्चित होती है।उन्होंने कहा कि मंदेया
नदी केवल जल स्रोत नहीं बल्कि छतरपुर की ऐतिहासिक पहचान और
सांस्कृतिक विरासत है। इसके पुनर्जीवन से पूरे क्षेत्र को लाभ मिलेगा।अध्यक्ष ने व्यवसायियों, समाजसेवियों, युवाओं और आम नागरिकों से इस अभियान में
सक्रिय सहयोग की अपील की। उन्होंने बताया कि भविष्य में मंदेया
रिवर फ्रंट व्यू विकसित करने की दिशा में भी योजनाबद्ध
तरीके से कार्य किया जाएगा जिससे नदी का सौंदर्यीकरण और संरक्षण
दोनों सुनिश्चित हो सके।समाजसेवी रविशंकर सिंह उर्फ बबुआ जी ने कहा कि छतरपुर को
स्वच्छ सुंदर
और हरित नगर बनाने के लिए वे हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने
कहा कि प्राकृतिक जल स्रोतों की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और
इसके लिए समाज को एकजुट होना होगा।नगर पंचायत ने नागरिकों से अपील की है कि वे जल
स्रोतों में कचरा न फेंकें, अतिक्रमण
रोकने में सहयोग करें तथा संरक्षण एवं सफाई अभियान में भागीदारी निभाएं। जनसहयोग
से ही तालाब कुएं
और नदियों को पुनर्जीवित कर स्वच्छ सुंदर और हरित छतरपुर का सपना साकार
किया जा सकता है।














