पटना: बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आरजेडी नेता रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान रेड कार्पेट बिछाए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे लेकर सरकार की व्यवस्था और प्रोटोकॉल पर निशाना साधा।

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि जब बाढ़ प्रभावित लोग मुश्किल परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, ऐसे समय में मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान रेड कार्पेट का इस्तेमाल किया जाना उचित नहीं है। उन्होंने इसे लेकर सरकार पर तंज कसते हुए आपदा के समय भी प्रोटोकॉल और दिखावे को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।

तटबंधों की स्थिति पर भी उठाए सवाल

रोहिणी आचार्य ने सारण समेत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तटबंधों की स्थिति को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि तटबंधों के रखरखाव पर बड़ी राशि खर्च किए जाने के बावजूद कई जगहों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हुए हैं। इन दावों पर सरकार की ओर से अलग-अलग स्तर पर स्थिति की निगरानी और राहत-बचाव कार्य जारी रहने की जानकारी दी गई है।

हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, गंडक नदी में बढ़े जलस्तर के बीच पश्चिम चंपारण और सारण में तटबंधों को नुकसान पहुंचा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 30 सितंबर को पश्चिम चंपारण और सारण के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया था। उन्होंने राहत शिविरों में व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के निर्देश दिए।

बाढ़ की स्थिति गंभीर

नेपाल के गंडक बेसिन में भारी बारिश के बाद गंडक नदी में जलस्तर बढ़ा है। इसके कारण उत्तर बिहार के कई जिलों में बाढ़ का असर देखने को मिला है। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, वैशाली और सारण के कई इलाकों में लोग प्रभावित हुए हैं। जल संसाधन विभाग की टीमें तटबंधों की निगरानी और आवश्यक मरम्मत कार्य में जुटी हैं।

रोहिणी आचार्य ने अपने बयान में सरकार की तैयारियों और बाढ़ प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। वहीं, सरकार और प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत, बचाव और तटबंधों की निगरानी का काम जारी है। ऐसे में राजनीतिक आरोपों के बीच जमीनी स्तर पर राहत कार्य और बाढ़ की स्थिति पर प्रशासन की निगरानी बनी हुई है।