नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी तनाव और बदलते भू-राजनयिक समीकरणों के बीच भारत और मिस्र के बीच रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ मक्का समझौते और पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

यह मुलाकात BRICS Summit के दौरान हुई, जिसके लिए मिस्र के राष्ट्रपति भारत दौरे पर आए थे।

PM मोदी और अल-सीसी के बीच क्या हुई चर्चा?

जानकारी रखने वाले सूत्रों के मुताबिक, रविवार को BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी के बीच मुलाकात हुई। बातचीत में मक्का समझौते और इसके क्षेत्रीय एवं व्यापक प्रभावों पर चर्चा हुई।

दोनों नेताओं ने भारत और मिस्र के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के उपायों पर भी विचार किया। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।

क्या है मक्का समझौता?

मक्का समझौते को पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग से जुड़े एक संभावित त्रिपक्षीय ढांचे के तौर पर देखा जाता है। इसको लेकर भारत, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच संभावित सहयोग की चर्चा होती रही है।

हालांकि, मिस्र ने अभी तक इस व्यवस्था का हिस्सा बनने से दूरी बनाए रखी है। विश्लेषकों के मुताबिक, काहिरा की विदेश नीति लंबे समय से संतुलित संबंधों और किसी एक क्षेत्रीय गुट में पूरी तरह शामिल होने से बचने पर केंद्रित रही है।

मिस्र ने मक्का पैक्ट से क्यों बनाई दूरी?

मिस्र 2024 में BRICS का सदस्य बना था। पश्चिम एशिया और अफ्रीका में अपनी रणनीतिक भूमिका को देखते हुए काहिरा कई देशों के साथ समान रूप से संबंध बनाए रखने की नीति पर चलता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मिस्र का किसी विशेष क्षेत्रीय गठजोड़ में शामिल होने से बचना उसकी व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है। सऊदी अरब, यूएई, इजरायल और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के साथ मिस्र के अलग-अलग स्तर पर संबंध हैं।

भारत-मिस्र के रिश्ते क्यों अहम?

भारत और मिस्र के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा क्षेत्र में संबंध लगातार विकसित हुए हैं। दोनों देश क्षेत्रीय स्थिरता, आतंकवाद से मुकाबले और वैश्विक मंचों पर सहयोग जैसे मुद्दों पर भी संपर्क में रहते हैं।

मिस्र की भौगोलिक स्थिति भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है। स्वेज नहर के जरिए एशिया और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में मिस्र के साथ मजबूत रणनीतिक और आर्थिक संबंध भारत के लिए अहम माने जाते हैं।

BRICS में मिस्र की भूमिका

मिस्र जनवरी 2024 से BRICS का सदस्य है। संगठन के विस्तार के बाद मिस्र की भूमिका पश्चिम एशिया और अफ्रीका के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखी जा रही है।

BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति अल-सीसी की मुलाकात इसी व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण रही। दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने और बदलती वैश्विक परिस्थितियों में आपसी समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया गया।