NEW DELHI: देश में NEET-UG पेपर लीक को लेकर हुए CJP आंदोलन की चर्चा अभी थमी भी नहीं थी कि अब E20 फ्यूल को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों और संसद तक इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर E20 फ्यूल का विरोध क्यों हो रहा है और क्या यह आंदोलन भी CJP की तरह बड़ा रूप ले सकता है?


क्या है E20 फ्यूल?

E20 ऐसा पेट्रोल है जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। केंद्र सरकार ने तेल आयात कम करने, प्रदूषण घटाने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ावा दिया है।

हालांकि, कई वाहन मालिकों का दावा है कि उनकी पुरानी गाड़ियां E20 के अनुरूप नहीं हैं और इससे माइलेज कम होने तथा इंजन पर असर पड़ने की आशंका है। वहीं सरकार का कहना है कि उपलब्ध परीक्षणों में E20 से इंजन को नुकसान होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है।

विरोध क्यों बढ़ रहा है?

E20 को लेकर विरोध के पीछे मुख्य कारण ये बताए जा रहे हैं—

पुरानी गाड़ियों में माइलेज कम होने की शिकायत।
इंजन की कार्यक्षमता को लेकर आशंकाएं।
उपभोक्ताओं को सामान्य पेट्रोल और E20 में विकल्प नहीं मिलने का आरोप।
सोशल मीडिया पर इस विषय से जुड़े अभियान और चर्चाओं का तेजी से फैलना।
तीन स्तर पर चल रहा है विरोध
1. राजनीतिक मोर्चा

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने E20 नीति पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के लिए टाउन हॉल आयोजित करने की घोषणा की है। उनके अनुसार इस नीति की स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए और उपभोक्ताओं को विकल्प दिया जाना चाहिए।

2. ट्रांसपोर्ट यूनियन का विरोध

दिल्ली की कई ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने संसद मार्च की घोषणा करते हुए E20 नीति की स्वतंत्र वैज्ञानिक समीक्षा की मांग की है। यूनियनों का कहना है कि वे नीति पर पुनर्विचार चाहते हैं, न कि केवल राजनीतिक बहस।

3. सोशल मीडिया अभियान

सोशल मीडिया पर 'E20 जनता पार्टी' नाम से चल रहे अभियान ने कुछ ही दिनों में बड़ी संख्या में लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। अभियान की प्रमुख मांगें हैं—

E20 और सामान्य पेट्रोल में विकल्प मिले।
माइलेज और इंजन पर प्रभाव की स्वतंत्र जांच हो।
नीति की समीक्षा की जाए।
सरकार का क्या कहना है?

केंद्र सरकार का कहना है कि E20 एक स्वच्छ और सुरक्षित ईंधन है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार उपलब्ध परीक्षणों में इससे इंजन को नुकसान होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है।

सरकार ने संसद में यह भी कहा कि उसने यह अलग से आकलन नहीं किया है कि देश में कितनी गाड़ियां पूरी तरह E20 के अनुकूल हैं। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है।

नितिन गडकरी ने क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया है कि E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम उनके मंत्रालय के अधीन नहीं, बल्कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है।

उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर उनके नाम से प्रसारित कुछ सामग्री भ्रामक है और इस संबंध में उन्होंने कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया है।

क्या CJP जैसा बड़ा आंदोलन बन सकता है?

यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। E20 का मुद्दा देशभर के वाहन चालकों से जुड़ा है, इसलिए इसका दायरा बड़ा माना जा रहा है। दूसरी ओर, इस समय विरोध करने वाले अलग-अलग समूह अपनी-अपनी रणनीति से काम कर रहे हैं और कोई साझा मंच सामने नहीं आया है।

आने वाले दिनों में प्रस्तावित कार्यक्रमों और सरकार की प्रतिक्रिया के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि यह विरोध सीमित रहता है या व्यापक जन आंदोलन का रूप लेता है।