दवाओं की खरीद के लिए गोड्डा को 19.59 लाख का अतिरिक्त फंड जारी
गोड्डा: स्वास्थ्य विभाग ने गोड्डा जिले में दवाओं की खरीद के लिए 19.59 लाख रुपये का अतिरिक्त फंड जारी किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जारी इस राशि से जिले में चिकित्सा आपूर्ति का कुल बजट बढ़कर 1 करोड़ 79 लाख 59 हजार 500 रुपये हो गया है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने 15 सितंबर को इस संबंध में आदेश जारी किया। यह राशि ‘चिकित्सा तथा लोक स्वास्थ्य’ मद में आवंटित की गई है। विभाग के अनुसार, झारखंड हाईकोर्ट में चल रहे एक मामले के संदर्भ में यह अतिरिक्त राशि जारी की गई है। सरकार ने दवाओं की खरीद को लेकर अधिकारियों को कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अस्पतालों में सांप काटने और कुत्ता काटने के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी गई है। दवाओं की खरीद जरूरी दवा सूची के अनुसार ही की जाएगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि गैर-जरूरी दवाओं की खरीद नहीं की जाएगी। अस्पतालों को उपलब्ध कराई जाने वाली दवाओं में कम से कम 80 प्रतिशत शेल्फ लाइफ बची होना अनिवार्य किया गया है। दवाओं की खरीद सरकारी नियमों के अनुसार GeM पोर्टल या ई-टेंडर के माध्यम से की जाएगी। अस्पतालों में दवाओं का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के लिए एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। नोडल अधिकारी हर महीने अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता और स्टॉक की स्थिति की रिपोर्ट तैयार करेंगे। वहीं, आवंटित राशि खर्च होने के बाद सिविल सर्जन को स्टॉक रजिस्टर का भौतिक सत्यापन कराना होगा। इसके बाद उपयोगिता प्रमाण पत्र स्वास्थ्य विभाग को भेजना अनिवार्य होगा। स्वास्थ्य विभाग के इन निर्देशों के तहत जरूरी दवाओं की उपलब्धता, स्टॉक की निगरानी और खरीद प्रक्रिया में नियमों के पालन पर जोर दिया गया है।गोड्डा: स्वास्थ्य विभाग ने गोड्डा जिले में दवाओं की खरीद के लिए 19.59 लाख रुपये का अतिरिक्त फंड जारी किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जारी इस राशि से जिले में चिकित्सा आपूर्ति का कुल बजट बढ़कर 1 करोड़ 79 लाख 59 हजार 500 रुपये हो गया है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने 15 सितंबर को इस संबंध में आदेश जारी किया। यह राशि ‘चिकित्सा तथा लोक स्वास्थ्य’ मद में आवंटित की गई है। विभाग के अनुसार, झारखंड हाईकोर्ट में चल रहे एक मामले के संदर्भ में यह अतिरिक्त राशि जारी की गई है। सरकार ने दवाओं की खरीद को लेकर अधिकारियों को कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अस्पतालों में सांप काटने और कुत्ता काटने के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी गई है। दवाओं की खरीद जरूरी दवा सूची के अनुसार ही की जाएगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि गैर-जरूरी दवाओं की खरीद नहीं की जाएगी। अस्पतालों को उपलब्ध कराई जाने वाली दवाओं में कम से कम 80 प्रतिशत शेल्फ लाइफ बची होना अनिवार्य किया गया है। दवाओं की खरीद सरकारी नियमों के अनुसार GeM पोर्टल या ई-टेंडर के माध्यम से की जाएगी। अस्पतालों में दवाओं का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के लिए एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। नोडल अधिकारी हर महीने अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता और स्टॉक की स्थिति की रिपोर्ट तैयार करेंगे। वहीं, आवंटित राशि खर्च होने के बाद सिविल सर्जन को स्टॉक रजिस्टर का भौतिक सत्यापन कराना होगा। इसके बाद उपयोगिता प्रमाण पत्र स्वास्थ्य विभाग को भेजना अनिवार्य होगा। स्वास्थ्य विभाग के इन निर्देशों के तहत जरूरी दवाओं की उपलब्धता, स्टॉक की निगरानी और खरीद प्रक्रिया में नियमों के पालन पर जोर दिया गया है।गोड्डा: स्वास्थ्य विभाग ने गोड्डा जिले में दवाओं की खरीद के लिए 19.59 लाख रुपये का अतिरिक्त फंड जारी किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जारी इस राशि से जिले में चिकित्सा आपूर्ति का कुल बजट बढ़कर 1 करोड़ 79 लाख 59 हजार 500 रुपये हो गया है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने 15 सितंबर को इस संबंध में आदेश जारी किया। यह राशि ‘चिकित्सा तथा लोक स्वास्थ्य’ मद में आवंटित की गई है। विभाग के अनुसार, झारखंड हाईकोर्ट में चल रहे एक मामले के संदर्भ में यह अतिरिक्त राशि जारी की गई है। सरकार ने दवाओं की खरीद को लेकर अधिकारियों को कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अस्पतालों में सांप काटने और कुत्ता काटने के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी गई है। दवाओं की खरीद जरूरी दवा सूची के अनुसार ही की जाएगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि गैर-जरूरी दवाओं की खरीद नहीं की जाएगी। अस्पतालों को उपलब्ध कराई जाने वाली दवाओं में कम से कम 80 प्रतिशत शेल्फ लाइफ बची होना अनिवार्य किया गया है। दवाओं की खरीद सरकारी नियमों के अनुसार GeM पोर्टल या ई-टेंडर के माध्यम से की जाएगी। अस्पतालों में दवाओं का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के लिए एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। नोडल अधिकारी हर महीने अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता और स्टॉक की स्थिति की रिपोर्ट तैयार करेंगे। वहीं, आवंटित राशि खर्च होने के बाद सिविल सर्जन को स्टॉक रजिस्टर का भौतिक सत्यापन कराना होगा। इसके बाद उपयोगिता प्रमाण पत्र स्वास्थ्य विभाग को भेजना अनिवार्य होगा। स्वास्थ्य विभाग के इन निर्देशों के तहत जरूरी दवाओं की उपलब्धता, स्टॉक की निगरानी और खरीद प्रक्रिया में नियमों के पालन पर जोर दिया गया है।सांप और कुत्ते के काटने की दवाओं पर प्राथमिकता
80 फीसदी शेल्फ लाइफ जरूरी
नोडल अधिकारी रखेंगे दवाओं के स्टॉक पर नजर
सांप और कुत्ते के काटने की दवाओं पर प्राथमिकता
80 फीसदी शेल्फ लाइफ जरूरी
नोडल अधिकारी रखेंगे दवाओं के स्टॉक पर नजर
सांप और कुत्ते के काटने की दवाओं पर प्राथमिकता
80 फीसदी शेल्फ लाइफ जरूरी
नोडल अधिकारी रखेंगे दवाओं के स्टॉक पर नजर














