अयोध्या:  राम मंदिर के बढ़ते विस्तार और श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ रही संख्या के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ट्रस्ट ने एयरफोर्स में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला CEO नियुक्त किया है।

जितेंद्र मिश्रा की भूमिका सिर्फ मंदिर में आने वाले चढ़ावे की निगरानी तक सीमित नहीं होगी। ट्रस्ट के CEO के तौर पर उनके जिम्मे मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय, कर्मचारियों की जिम्मेदारी, धार्मिक आयोजनों की व्यवस्थाएं और ट्रस्ट की संपत्तियों का प्रबंधन जैसे कई महत्वपूर्ण काम होंगे।

ट्रस्ट की नीतियों को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी

CEO ट्रस्ट द्वारा तय की गई नीतियों और बड़े फैसलों को जमीन पर लागू कराने का काम करेंगे। वह ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी को रिपोर्ट करेंगे।

मंदिर में अलग-अलग विभाग किस तरह काम करेंगे, अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारियां क्या होंगी, काम की निगरानी कैसे होगी और अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल किस तरह बनाया जाएगा, इन सभी मामलों में CEO की अहम भूमिका होगी।

मंदिर के लिए नई SOP और ऑपरेशनल सिस्टम तैयार करेंगे

जितेंद्र मिश्रा के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक मंदिर की व्यवस्थाओं के लिए नई SOP (Standard Operating Procedure) तैयार करना होगा।

बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान कर्मचारियों की तैनाती, श्रद्धालुओं का प्रवेश और निकास, VIP मूवमेंट, आपातकालीन स्थिति में कार्रवाई, दान की गिनती और जमा करने की प्रक्रिया समेत कई व्यवस्थाओं को तय करने के लिए SOP तैयार की जाएगी।

इससे मंदिर की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने की कोशिश होगी।

चढ़ावे और दान की व्यवस्था पर भी रहेगी नजर

राम मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे का पारदर्शी प्रबंधन भी CEO की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल होगा। मंदिर में आने वाले धन की गिनती, रिकॉर्डिंग, जमा करने और उसके प्रबंधन की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना होगा।

कौन-कौन लोग दान की प्रक्रिया से जुड़े होंगे और किस स्तर पर उसकी निगरानी होगी, इन तमाम पहलुओं के लिए एक मजबूत सिस्टम तैयार करने की जिम्मेदारी भी CEO की होगी।

कर्मचारियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करेंगे

मंदिर ट्रस्ट से जुड़े विभिन्न विभागों और कर्मचारियों के बीच काम का बंटवारा और उनकी जवाबदेही तय करने में CEO की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

मैनेजमेंट, वित्त, सुरक्षा और श्रद्धालु सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के काम की निगरानी, जरूरत के मुताबिक टीम का गठन और व्यवस्था में कमियों को दूर करना भी CEO के प्रशासनिक दायरे में आएगा।

श्रद्धालुओं की सुविधा सबसे अहम जिम्मेदारियों में शामिल

राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में CEO की भूमिका का एक बड़ा हिस्सा श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और बेहतर दर्शन व्यवस्था से जुड़ा होगा।

मंदिर तक पहुंचने, प्रवेश और निकास, कतार प्रबंधन, भीड़ के दौरान व्यवस्था, बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं तथा दर्शन के दौरान अव्यवस्था रोकने जैसे मामलों पर CEO को काम करना होगा।

सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन से करना होगा समन्वय

राम मंदिर की सुरक्षा एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय है। मंदिर की सुरक्षा का संचालन पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के पास रहेगा, लेकिन ट्रस्ट की ओर से सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े समन्वय और प्रशासनिक तैयारियों में CEO की भूमिका अहम होगी।

पुलिस-प्रशासन के साथ सूचना का आदान-प्रदान, भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन योजना और जरूरी सुविधाओं को लेकर समन्वय करना उनके काम का हिस्सा हो सकता है।

जितेंद्र मिश्रा का सैन्य क्षेत्र का अनुभव इस जिम्मेदारी में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

राम नवमी और दीपावली जैसे बड़े आयोजनों की तैयारी

राम मंदिर में सामान्य दिनों के अलावा राम नवमी, दीपावली और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ सकती है। ऐसे मौकों के लिए पहले से विस्तृत योजना तैयार करना CEO की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

कितने श्रद्धालु पहुंच सकते हैं, कितने प्रवेश मार्ग की जरूरत होगी, पार्किंग की व्यवस्था कहां होगी, चिकित्सा सहायता कैसे उपलब्ध कराई जाएगी और अतिरिक्त पुलिस बल की आवश्यकता कितनी होगी इन सभी पहलुओं पर संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय करना होगा।

पूजा-पाठ नहीं चलाएंगे, लेकिन व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे

CEO मंदिर के धार्मिक गुरु या आचार्य नहीं होंगे। मंदिर की पूजा-पद्धति और धार्मिक अनुष्ठान अपने निर्धारित धार्मिक ढांचे के अनुसार ही संचालित होंगे।

हालांकि, धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था सुचारु रहे, इसकी जिम्मेदारी CEO की होगी। कर्मचारियों की तैनाती, श्रद्धालुओं की आवाजाही, सुरक्षा और आयोजन से जुड़ी लॉजिस्टिक्स को व्यवस्थित करना उनके प्रशासनिक काम का हिस्सा होगा।

VIP और संतों के लिए भी व्यवस्था

राम मंदिर में देश के अलग-अलग हिस्सों से महत्वपूर्ण व्यक्ति, संत और धार्मिक नेता पहुंचते हैं। ऐसे विशिष्ट अतिथियों के आगमन, सुरक्षा, प्रवेश, दर्शन और वापसी की व्यवस्था को संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर तैयार करना भी CEO की जिम्मेदारी में शामिल होगा।

ट्रस्ट के अधीन रहेंगे CEO, सरकार के नहीं

राम मंदिर ट्रस्ट एक अलग संस्था है और CEO सरकारी विभाग के अधिकारी के रूप में काम नहीं करेंगे। वह ट्रस्ट के अधीन रहेंगे और जनरल सेक्रेटरी को रिपोर्ट करेंगे।

हालांकि, सुरक्षा, यातायात, बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और बड़े आयोजनों जैसे मामलों में जिला प्रशासन और पुलिस समेत विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय आवश्यक होगा।

ट्रस्ट की संपत्तियों का भी होगा प्रबंधन

राम मंदिर ट्रस्ट के पास मंदिर परिसर के अलावा उससे जुड़ी अन्य संपत्तियां और संसाधन भी हैं। इन संपत्तियों की सुरक्षा, प्रबंधन और निर्धारित नियमों के अनुरूप इस्तेमाल सुनिश्चित करना भी CEO की जिम्मेदारियों में शामिल होगा।

भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार होगा सिस्टम

CEO की भूमिका केवल वर्तमान व्यवस्था संभालने तक सीमित नहीं रहेगी। मंदिर परिसर के विस्तार और आने वाले वर्षों में श्रद्धालुओं की संभावित बढ़ती संख्या को देखते हुए लंबी अवधि की प्रशासनिक और प्रबंधन व्यवस्था तैयार करना भी जरूरी होगा।

आज की जरूरत के मुताबिक तैयार सिस्टम को भविष्य में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ संभालने के योग्य बनाने की दिशा में CEO काम करेंगे।

ट्रस्ट के कामकाज में जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश

जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रोफेशनल और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

CEO पद के जरिए ट्रस्ट की नीतियों के क्रियान्वयन, विभागों की जवाबदेही और मंदिर की रोजमर्रा की व्यवस्थाओं के लिए एक स्पष्ट प्रशासनिक ढांचा तैयार करने की कोशिश की गई है।

यानी राम मंदिर के CEO की भूमिका सिर्फ चढ़ावे पर नजर रखने तक सीमित नहीं, बल्कि मंदिर के पूरे प्रशासनिक और ऑपरेशनल सिस्टम को व्यवस्थित करने से जुड़ी होगी।