हजारीबाग के 143 साल पुराने बजरिया स्कूल पर हादसे का खतरा
हजारीबाग: जिस विद्यालय ने कभी
हजारीबाग की पीढ़ियों को शिक्षा की रोशनी दिखाई,
आज वही विद्यालय खुद बदहाली के अंधेरे
में डूबा हुआ है। नगर निगम क्षेत्र के रुक्मिणी भवन के समीप स्थित बाड़ा बाजार का
ऐतिहासिक राजकीय मध्य विद्यालय, बजरिया स्कूल, इन दिनों अपने अस्तित्व के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। वर्ष 1883
में स्थापित यह विद्यालय हजारीबाग
जिले और तत्कालीन नगर पालिका के शुरुआती सरकारी विद्यालयों में अपनी ऐतिहासिक पहचान
रखता है। कभी यहां से पढ़कर निकले विद्यार्थियों ने देश-विदेश में विभिन्न
प्रतिष्ठित पदों पर पहुंचकर नाम कमाया,
लेकिन आज विद्यालय भवन की हालत ऐसी है
कि यहां पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा ही सबसे बड़ा सवाल बन गई है। छत
से गिरता मलबा, कमरों में बैठने से डरते हैं बच्चे विद्यालय भवन की जर्जर हालत किसी बड़े
हादसे की आशंका को जन्म दे रही है। दीवारों की पपड़ियां उखड़ चुकी हैं और कई
हिस्सों में सीमेंट-बालू लगातार झड़ रहा है। छत की स्थिति भी बेहद खराब बताई जा
रही है। स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हीरा राम के अनुसार, कई बार छत से पत्थर
और मलबा टूटकर नीचे गिर जाता है। ऐसे में बच्चों को कक्षाओं के अंदर बैठाना जोखिम
भरा हो गया है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए
शिक्षकों ने उन्हें जर्जर कमरों में बैठाने के बजाय बरामदे में पढ़ाना शुरू कर
दिया है। लेकिन अब बरामदे की स्थिति भी धीरे-धीरे खराब होती जा रही है। ऐसे में
सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इन मासूम बच्चों को सुरक्षित तरीके से पढ़ाया जाए तो
कहां? बारिश
शुरू होते ही बढ़ जाता है डर बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो
जाती है। बारिश के दौरान जर्जर भवन के अंदर और आसपास पानी पहुंचने से बच्चों और
शिक्षकों की चिंता बढ़ जाती है। हर तेज बारिश के साथ भवन की कमजोर संरचना को लेकर
डर बना रहता है। विद्यालय प्रबंधन और स्थानीय लोगों का
कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत या नए भवन का निर्माण नहीं कराया गया तो
किसी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा
मामला होने के बावजूद कार्रवाई में हो रही देरी चिंता बढ़ा रही है। अधिकारियों
ने किया निरीक्षण, एस्टीमेट भी बना,
फिर भी काम का इंतजार मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन और
शिक्षा विभाग के अधिकारियों की टीम ने विद्यालय का निरीक्षण किया था। बताया गया कि
जिला योजना से जुड़े इंजीनियरों ने भी भवन की स्थिति का जायजा लिया और जर्जर भवन
के लिए एस्टीमेट तैयार कर डीसी फंड के लिए भेजा गया। स्कूल प्रबंधन के अनुसार निरीक्षण और
एस्टीमेट तैयार किए जाने के करीब
15 से 20 दिन
बीत चुके हैं, लेकिन अब तक धरातल पर
निर्माण या मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ है। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि कागजी
प्रक्रिया अपनी जगह है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए कार्रवाई में तेजी जरूरी
है। डर
के कारण घट रही बच्चों की संख्या जर्जर भवन का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी
पड़ रहा है। विद्यालय में पहले करीब
65 से 70 बच्चे
पढ़ते थे,
लेकिन मौजूदा परिस्थितियों के कारण
छात्र संख्या घटकर करीब 51 रह गई है। कुछ अभिभावकों ने सुरक्षा को लेकर अपने बच्चों का
नाम दूसरे विद्यालयों में करा दिया है। जो बच्चे अभी विद्यालय में पढ़ रहे हैं, उनके अभिभावक भी हर
दिन चिंता के साथ उन्हें स्कूल भेज रहे हैं। शिक्षकों के लिए भी बच्चों को पढ़ाने
के साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बन गया है। 143
साल पुरानी विरासत को बचाने की गुहार बजरिया स्कूल सिर्फ एक भवन नहीं, बल्कि हजारीबाग की
शैक्षणिक विरासत का हिस्सा है। स्थानीय लोगों और विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि
ऐतिहासिक पहचान रखने वाले इस विद्यालय को यूं ही जर्जर हालत में नहीं छोड़ा जा
सकता। जरूरत इस बात की है कि पुराने भवन की तकनीकी जांच कराकर सुरक्षित और आधुनिक
विद्यालय भवन का निर्माण कराया जाए। डीसी
से उम्मीद, जल्द हो ठोस फैसला विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हीरा राम
ने उपायुक्त से तत्काल हस्तक्षेप की
अपील की है। उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य के साथ उनकी सुरक्षा भी सर्वोच्च
प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका कहना है कि एस्टीमेट तैयार हो चुका है तो अब स्वीकृति
और निर्माण की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। बजरिया स्कूल की जर्जर दीवारें और छत
सिर्फ एक भवन की बदहाली नहीं बता रहीं,
बल्कि उस व्यवस्था पर भी सवाल उठा रही
हैं जो 143
साल पुरानी शैक्षणिक विरासत और उसमें पढ़ने वाले मासूम बच्चों को सुरक्षित माहौल देने की
जिम्मेदारी निभाती है। अब निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।















