हल चलाते नजर आए स्वास्थ्य मंत्री, दे दी विपक्ष को नसीहत कहा खेतों में उतरें भाजपा नेता, सोशल मीडिया से नहीं समझेंगे किसानों का दर्द
जामताड़ा: झारखंड की राजनीति में खेती, किसानों के अधिकार और राज्य के खनिज संसाधनों को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर पार्टी को वास्तव में झारखंड और यहां के लोगों की चिंता है, तो नेताओं को खेतों में उतरकर किसानों की समस्याएं समझनी चाहिए। केवल खनिज संपदा को लेकर राजनीति करने से राज्य के किसानों का भला नहीं होगा। मंत्री ने दावा किया कि वह खुद खेती से जुड़े रहते हैं और किसानों को इसके लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने भाजपा नेताओं पर सोशल मीडिया के जरिए खेती-किसानी की बात करने का आरोप लगाया। अंसारी के मुताबिक, कार्यालयों में बैठकर किसानों के मुद्दे उठाना आसान है, लेकिन खेतों में काम करने और किसानों की परेशानियों को करीब से समझने के बाद ही उनकी वास्तविक चुनौतियों का एहसास होता है। डॉ. इरफान अंसारी ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि मरांडी को पहले अपनी पार्टी के भीतर की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। मंत्री ने आरोप लगाया कि अगर वह पार्टी के भीतर स्वतंत्र रूप से झारखंड के हितों की बात नहीं रख पा रहे हैं, तो उन्हें अपनी राजनीतिक भूमिका पर विचार करना चाहिए। अंसारी ने राज्य के प्राकृतिक संसाधनों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि झारखंड के संसाधनों का इस्तेमाल राज्य के लोगों के हित में होना चाहिए। उनके अनुसार, राज्य की खनिज संपदा को लेकर होने वाले फैसलों में किसानों, आदिवासियों और स्थानीय लोगों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि झारखंड की पहचान केवल कोयला, लोहा और दूसरे खनिजों तक सीमित नहीं है। यह किसानों, आदिवासियों और मेहनतकश लोगों की धरती है। राज्य की प्रगति का आकलन केवल खनिज उत्पादन से नहीं, बल्कि यहां के लोगों की आर्थिक स्थिति और किसानों को मिलने वाले लाभ से भी होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों को मजबूत बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। मंत्री ने इस वर्ष किसानों को पिछले साल की तुलना में बेहतर लाभ दिलाने का लक्ष्य भी बताया। हालांकि, इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए कौन-सी योजनाएं या अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे, इसकी विस्तृत जानकारी उनके बयान में नहीं दी गई। अपनी बात रखते हुए डॉ. अंसारी ने कहा कि उनका किसानों से जुड़ाव केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं किसान का बेटा हूं। मेरी राजनीति बयानबाजी नहीं, जमीन पर काम करके किसानों को उनका हक दिलाने की है।” मंत्री ने यह भी कहा कि झारखंड के प्रति प्रेम केवल भाषणों से साबित नहीं होता, बल्कि किसानों की मेहनत का सम्मान करने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए काम करने से होता है। इरफान अंसारी के इस बयान ने झारखंड में खेती-किसानी और खनिज संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस को फिर हवा दी है। उनके आरोप भाजपा की नीतियों और नेताओं की भूमिका पर केंद्रित हैं। वहीं, किसानों के हितों को लेकर सरकार के दावों का आकलन योजनाओं के क्रियान्वयन, किसानों की आय और उन्हें मिलने वाले वास्तविक लाभ के आधार पर किया जाना महत्वपूर्ण होगा।बाबूलाल मरांडी पर भी साधा निशाना
‘झारखंड सिर्फ खनिज संपदा नहीं’
‘मैं किसान का बेटा हूं’
खेती और संसाधनों पर सियासी बहस















