ईरान-अमेरिका तनाव में न्यूक्लियर एंगल की एंट्री! ट्रंप प्रशासन पर परमाणु विकल्प पर चर्चा का दावा, खाड़ी देशों में बढ़ी चिंता
नई दिल्ली : ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिका की पूर्व कांग्रेस सदस्य मार्जोरी टेलर ग्रीन ने दावा किया है कि ट्रंप प्रशासन की रणनीतिक बैठकों में ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना पर चर्चा हुई है। हालांकि, ग्रीन ने अपने दावे के समर्थन में कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया है और अमेरिकी सरकार की ओर से भी इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ग्रीन ने सोशल मीडिया पोस्ट में इस कथित चर्चा को बेहद गंभीर बताते हुए परमाणु युद्ध के खतरे की चेतावनी दी। उनका कहना है कि ऐसा कदम उठाया गया तो इसके परिणाम केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका वास्तव में ईरान के खिलाफ परमाणु हथियार इस्तेमाल करने पर विचार कर रहा है। फिलहाल इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ग्रीन का दावा सामने आने के बाद परमाणु विकल्प को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जरूर तेज हुई है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह कह रहे हैं कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनकी प्राथमिकता है। यानी परमाणु हमले का दावा अभी एक पूर्व अमेरिकी सांसद का आरोप है, न कि अमेरिकी सरकार की घोषित नीति। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष में परमाणु कार्यक्रम सबसे बड़े विवादों में से एक है। वाशिंगटन का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जबकि तेहरान लंबे समय से अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों से जोड़ता रहा है। हाल के महीनों में सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक प्रयासों के बीच तनाव लगातार बढ़ा है। इसके साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। यह मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और व्यापक होता है, तो उसका सीधा असर खाड़ी क्षेत्र पर पड़ सकता है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, ओमान और बहरीन जैसे देशों में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और रणनीतिक ठिकाने हैं। ईरान पहले भी यह संकेत देता रहा है कि उसके खिलाफ इस्तेमाल होने वाली सैन्य सुविधाओं को लेकर वह कड़ा जवाब दे सकता है। ऐसे में यदि संघर्ष खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों तक फैलता है तो क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ सकती है। हालांकि, किसी विशेष खाड़ी देश पर ईरानी हमला होने की निश्चित भविष्यवाणी करना फिलहाल संभव नहीं है। परमाणु हथियार के इस्तेमाल की स्थिति में इसका प्रभाव बेहद विनाशकारी हो सकता है। सबसे पहले प्रभावित क्षेत्र में भारी जनहानि और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विनाश होगा। इसके बाद रेडियोधर्मी प्रदूषण, स्वास्थ्य संकट और बड़े पैमाने पर विस्थापन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा संघर्ष अगर व्यापक हुआ तो इसका असर तेल आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लंबे समय तक व्यवधान आने की स्थिति में ऊर्जा बाजारों पर भारी दबाव पड़ सकता है। मौजूदा संघर्ष के कारण तेल बाजार पहले ही प्रभावित हो चुका है। परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की चर्चा इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि इससे संघर्ष का दायरा तेजी से बढ़ सकता है। ईरान पहले से ही अमेरिकी सैन्य दबाव का सामना कर रहा है और क्षेत्र में कई देशों के अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। ऐसे में किसी भी बड़े हमले के बाद जवाबी कार्रवाई, क्षेत्रीय सैन्य ठिकानों पर हमले और समुद्री मार्गों में व्यवधान की आशंका बढ़ सकती है।क्या वाकई परमाणु हमले की तैयारी?
ईरान-अमेरिका तनाव क्यों बढ़ा?
खाड़ी देशों की क्यों बढ़ सकती है चिंता?
अगर परमाणु हमला हुआ तो क्या होगा?
सबसे बड़ा खतरा: संघर्ष का विस्तार
फिलहाल क्या साफ है?














