यूसिल प्रभावित गांवों में आदिवासियों का दर्द सुनने पहुंचीं डॉ. आशा लकड़ा, ग्रामीणों ने शिकायतों का खोला पिटारा
जादूगोड़ा: भारत सरकार के राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की अध्यक्षा डॉ. आशा लकड़ा बुधवार को दो दिवसीय दौरे पर जादूगोड़ा पहुंचीं। 9 और 10 सितंबर के दौरे के दौरान उन्होंने यूसिल (यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) के जादूगोड़ा प्रोजेक्ट से प्रभावित गांवों का दौरा कर आदिवासी ग्रामीणों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। डॉ. आशा लकड़ा के नेतृत्व में पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मेचुआ और इंचड़ा गांव पहुंचकर विस्थापित एवं प्रभावित ग्रामीणों से बातचीत की। इस दौरान ग्रामीणों ने यूसिल से जुड़ी कई समस्याओं को लेकर आयोग की अध्यक्षा के समक्ष अपनी शिकायतें रखीं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यूसिल प्रभावित गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, तालाबों की साफ-सफाई और सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाओं के मामले में अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना था कि कंपनी से सटे गांवों के आम लोगों को मिलने वाली ग्रामीण चिकित्सा सुविधा भी लंबे समय से बंद है। उनका आरोप है कि बीमार होने की स्थिति में जीरो किलो क्षेत्र के लोगों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध नहीं कराई जाती। ग्रामीणों ने यूसिल के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और विस्थापित परिवारों से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को भी आयोग की अध्यक्षा के सामने रखा। उनका कहना था कि बीमार पड़ने पर पूर्व कर्मचारियों को निजी वाहन से यूसिल अस्पताल जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने दावा किया कि आर्थिक और परिवहन सुविधाओं के अभाव में कई पूर्व कर्मचारियों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। उन्होंने आयोग से इन समस्याओं के समाधान के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की। ग्रामीणों की शिकायतें सुनने के बाद डॉ. आशा लकड़ा ने उन्हें भरोसा दिलाया कि अनुसूचित जनजाति आयोग आदिवासी समुदाय के अधिकारों और समस्याओं के समाधान के लिए बना है। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि वे अपनी शिकायतें आयोग के समक्ष रखें और समस्याओं के निष्पक्ष समाधान के लिए आयोग का सहारा लें। उन्होंने ग्रामीणों को उनकी शिकायतों के निराकरण की दिशा में उचित कार्रवाई का भरोसा भी दिया। डॉ. आशा लकड़ा के मेचुआ गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों और आदिवासी परंपरा के साथ उनका स्वागत किया। प्रतिनिधिमंडल के गांव पहुंचने पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और अपनी समस्याओं को सामने रखा। इस दौरान यूसिल कर्मचारी अनुसूचित जनजाति संघ के महासचिव सह यूसिल प्रशासनिक अधिकारी दीपेंदु हांसदा, स्टालिन हेंब्रम समेत संघ के अन्य सदस्य मौजूद रहे। कार्यक्रम में दामु नायक, सुरजीत सोरेन, बीरेन टुडू, सृजन टुडू, वीणा नंद सिरका, महेश साहू, जितराई सोरेन, मानिक चंद्र मुर्मू, लखन टुडू, मंगल टुडू, तुलसी मुंडा, सुधीर मुंडा, सुनील दिग्गी, सिद्धों हो, भोला नाथ टुडू, टिक्की मुखी और लेटा मुर्मू समेत अन्य लोग मौजूद थे। ग्रामीणों की ओर से मांझी बाबा डोमन श्याम सोरेन, नायके मधु सोरेन, कुशल सोरेन, विराम सोरेन, योगेन सोरेन और आमता सोरेन समेत काफी संख्या में ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं रखीं।शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल समेत बुनियादी सुविधाओं की शिकायत
सेवानिवृत्त कर्मचारियों और विस्थापितों की परेशानी भी उठाई
‘आयोग आपके लिए बना है’, डॉ. आशा लकड़ा ने दिया भरोसा
ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ पारंपरिक स्वागत
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद














