पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के रियल एस्टेट सेक्टर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों और श्रमिकों की कमी के चलते देशभर में कई हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी प्रभावित हो रही है। इसी को लेकर रियल एस्टेट डेवलपर्स की संस्था CREDAI  ने आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय और रेरा प्राधिकरणों से प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए 3 से 6 महीने की अतिरिक्त मोहलत देने की मांग की है। क्रेडाई का कहना है कि मौजूदा हालात को अप्रत्याशित आपातकाल माना जाना चाहिए क्योंकि बढ़ती लागत और सप्लाई चेन में रुकावट के कारण समय पर निर्माण कार्य पूरा करना मुश्किल हो गया है। डेवलपर्स के अनुसार  लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ने और मजदूरों की कमी की वजह से कई प्रोजेक्ट्स धीमी रफ्तार से चल रहे हैं। रियल एस्टेट सेक्टर का दावा है कि एलपीजी संकट और बढ़ती महंगाई के कारण बड़ी संख्या में मजदूर शहर छोड़कर गांव लौट रहे हैं। इससे निर्माण कार्य पर सीधा असर पड़ा है। वहीं मोरबी सिरेमिक हब में उत्पादन प्रभावित होने से टाइल्स की कीमतों में भी करीब 35 प्रतिसत  तक उछाल देखा गया है। ऊर्जा संकट और वैश्विक अनिश्चितता का असर निर्माण सामग्री पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम एशिया संकट के बाद सीमेंट की कीमतों में 30 प्रतिसत  स्टील में 5 से 10 प्रतिसत एल्युमीनियम में 8 से 12 प्रतिसत और कच्चे तेल में 46 से 60 प्रतिसत तक बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते कुल निर्माण लागत 6 से 10 प्रतिशत तक बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका सीधा असर घर खरीदने वालों पर पड़ेगा और कई लोगों का अपने सपनों का घर खरीदने का सपना फिलहाल अधूरा रह सकता है।