पटना:  बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा से चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा रहे हैं। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के बीच जन सुराज से जुड़े प्रशांत किशोर की जाति से ऊपर उठकर राजनीति करने की रणनीति भी चर्चा में है। सवाल उठ रहा है कि क्या वे बांकीपुर के परंपरागत सामाजिक और राजनीतिक समीकरण को बदल पाएंगे

वर्तमान बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र को लंबे समय से कायस्थ मतदाताओं के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है। हालांकि जब यह क्षेत्र पटना पश्चिम विधानसभा के नाम से जाना जाता था, तब यहां के मतदाताओं ने कई मौकों पर गैर-कायस्थ उम्मीदवारों को भी जीत दिलाई। पुराने चुनावी नतीजे बताते हैं कि इस क्षेत्र में जातीय समीकरण महत्वपूर्ण जरूर रहे हैं, लेकिन हर चुनाव में निर्णायक साबित नहीं हुए।

1957 में रामशरण साव ने दर्ज की जीत

1957 के पटना पश्चिम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच मुकाबला देखने को मिला। इस चुनाव में वैश्य समुदाय से आने वाले कांग्रेस उम्मीदवार रामशरण साव ने निर्दलीय उम्मीदवार जगन्नाथ प्रसाद को पराजित कर जीत दर्ज की। इस नतीजे ने उस दौर में क्षेत्र के परंपरागत जातीय समीकरण से अलग राजनीतिक संदेश दिया था।

1972 में सुनील मुखर्जी ने शैलेंद्र नाथ श्रीवास्तव को हराया

1972 के विधानसभा चुनाव में सीपीआई उम्मीदवार सुनील मुखर्जी और भारतीय जनसंघ के शैलेंद्र नाथ श्रीवास्तव के बीच मुकाबला हुआ। चुनाव में सुनील मुखर्जी ने जीत दर्ज की। उन्हें 29,537 वोट मिले, जबकि शैलेंद्र नाथ श्रीवास्तव को 26,162 मत प्राप्त हुए।

यह चुनाव भी पटना पश्चिम के राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि सामाजिक समीकरणों के साथ पार्टी और वैचारिक राजनीति ने भी परिणाम को प्रभावित किया।

1985 में निर्दलीय रामानंद यादव की जीत

1985 के विधानसभा चुनाव में रामानंद यादव ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरकर जीत हासिल की। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, रामानंद यादव को 28,062 मत मिले, जबकि दूसरे स्थान पर सीपीएम के योगेश्वर गोप रहे।

निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में रामानंद यादव की जीत ने यह संकेत दिया कि मजबूत व्यक्तिगत राजनीतिक आधार भी स्थापित दलों और पारंपरिक सामाजिक समीकरणों को चुनौती दे सकता है।

1990 में फिर जीते रामानंद यादव

1990 के पटना पश्चिम विधानसभा चुनाव में भी रामानंद यादव ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में उन्हें 35,083 मत मिले, जबकि जनता दल के रामकृपाल यादव को 31,844 वोट प्राप्त हुए। नवीन किशोर सिन्हा को 19,800 मत मिले थे।

इन चुनावी नतीजों से यह स्पष्ट होता है कि वर्तमान बांकीपुर और पुराने पटना पश्चिम क्षेत्र का चुनावी इतिहास केवल एक जातीय समीकरण तक सीमित नहीं रहा है। अलग-अलग दौर में उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, राजनीतिक परिस्थितियां और मतदाताओं की प्राथमिकताएं भी परिणाम तय करती रही हैं।

अब बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की रणनीति कितनी प्रभावी साबित होती है, यह चुनाव परिणाम ही बताएगा। लेकिन पुराने चुनावी इतिहास को देखें तो इस क्षेत्र के मतदाता पहले भी स्थापित सामाजिक समीकरणों से अलग जाकर अपना फैसला सुना चुके हैं।