लड़की, ट्रेन और शराब का खेल! बिहार में तस्करी का नया तरीका, नेहा-रिया मास्टरमाइंड या माफिया की मोहरा?
Bihar News: बिहार में शराबबंदी के बावजूद शराब की तस्करी का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब तस्करों ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए ऐसे तरीकों का सहारा लेना शुरू कर दिया है, जो जांच एजेंसियों के लिए भी चुनौती बन रहे हैं। हाल के दो मामलों में ट्रेन से शराब की खेप लेकर पहुंची युवतियों की गिरफ्तारी ने इस नए पैटर्न पर सवाल खड़े कर दिए हैं। समस्तीपुर में एसी फर्स्ट क्लास कोच से शराब की खेप के साथ एक युवती को पकड़ा गया, तो इसके कुछ ही समय बाद पटना जंक्शन के पास प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही एक छात्रा शराब के साथ गिरफ्तार हुई। दोनों मामलों ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या ये युवतियां खुद इस अवैध कारोबार का हिस्सा हैं या फिर बड़े शराब सिंडिकेट के लिए सिर्फ कैरियर के तौर पर इस्तेमाल की जा रही थीं? बिहार में शराबबंदी लागू हुए करीब एक दशक हो चुका है। इस दौरान शराब तस्करी के कई अनोखे तरीके सामने आए हैं। कभी एंबुलेंस तो कभी सरकारी गाड़ियों के जरिए शराब पहुंचाने के मामले पकड़े गए। ट्रेनों के जरिए भी शराब की तस्करी कोई नई बात नहीं है, लेकिन अब महिलाओं और युवतियों को कैरियर के तौर पर इस्तेमाल किए जाने के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। तस्करों की कोशिश रहती है कि ऐसी शक्ल-सूरत और परिस्थितियों का इस्तेमाल किया जाए, जिससे जांच के दौरान संदेह कम हो। इसी वजह से महिलाओं और परिवार जैसे दिखने वाले लोगों को भी शराब की डिलीवरी में इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आती रही है। हाल ही में गुप्त सूचना के आधार पर समस्तीपुर स्टेशन पर RPF और CIB की संयुक्त टीम ने स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान AC फर्स्ट क्लास के एक कूपे से समस्तीपुर के सिंघिया थाना क्षेत्र की रहने वाली नेहा झा को उसके जीजा ईशान कुमार के साथ हिरासत में लिया गया। तलाशी के दौरान दो सूटकेस से करीब 75 लीटर विदेशी शराब बरामद होने की बात सामने आई। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, नेहा के पिता और बड़ी बहन भी पूर्व में शराब तस्करी के मामलों में जेल जा चुके हैं। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद शराब कहां से लाई गई थी और इसे किसे पहुंचाया जाना था। समस्तीपुर के बाद पटना में भी ऐसा ही मामला सामने आया। कोतवाली थाना क्षेत्र के पटना जंक्शन के पास पुलिस ने रिया नाम की युवती को शराब की खेप के साथ गिरफ्तार किया। बताया गया कि रिया दानापुर की रहने वाली है और प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ बिहार पुलिस भर्ती की तैयारी कर रही थी। पुलिस ने उसके हैंडबैग और शोल्डर बैग की तलाशी ली, जिसमें करीब 14 हजार रुपये की अंग्रेजी शराब बरामद होने का दावा किया गया। पूछताछ में युवती ने कथित तौर पर बताया कि वह उत्तर प्रदेश के बनारस से शराब लेकर ट्रेन के जरिए पटना पहुंची थी। पुलिस के मुताबिक, शराब पहुंचाने के बदले उसे 2 हजार रुपये देने का झांसा दिया गया था। यह बयान अगर जांच में सही साबित होता है तो यह मामला शराब तस्करी में युवतियों को कैरियर के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की ओर इशारा कर सकता है। महिलाओं के इस्तेमाल का एक अलग तरीका मोतिहारी में भी सामने आया था। उत्पाद विभाग की कार्रवाई में एक महिला को लग्जरी कार से शराब ले जाते हुए पकड़ा गया। पूछताछ में महिला ने कथित तौर पर बताया कि पुलिस को शक न हो, इसलिए उसके साथ एक पुरुष और बच्चे को परिवार की तरह दिखाया गया था। महिला के मुताबिक, पुरुष को कथित तौर पर किराये के पति के तौर पर और बच्चे को साथ ले जाने के लिए पैसे दिए गए थे। महिला के उत्तर प्रदेश से शराब लेकर मुजफ्फरपुर जाने की बात सामने आई थी। इन घटनाओं के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि शराब की खेप लेकर पकड़ी जा रही महिलाएं और युवतियां इस नेटवर्क की मुख्य कड़ी हैं या फिर बड़े तस्करों के लिए सिर्फ डिलीवरी एजेंट के तौर पर काम कर रही हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और संपर्कों की जांच कर रही है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि शराब की खेप कहां से भेजी गई थी, इसके पीछे कौन लोग हैं और इसे बिहार में किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। अगर जांच में बड़े नेटवर्क का पता चलता है तो इन मामलों की असली तस्वीर सामने आ सकती है। बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में अब तक लाखों लोगों को शराब से जुड़े मामलों में सजा हुई है। इनमें बड़ी संख्या शराब सेवन से जुड़े मामलों की है, जबकि शराब की तस्करी और बड़े नेटवर्क तक पहुंचने में जांच एजेंसियों को अपेक्षाकृत ज्यादा चुनौती का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि तस्करी के मामलों में सिर्फ कैरियर को पकड़ने के बजाय पूरे सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, तस्कर गिरफ्तारी से बचने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपनाते हैं। महिलाओं को शराब की डिलीवरी में इस्तेमाल करना भी इसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, हर मामले में महिला आरोपी को सिर्फ 'मोहरा' मान लेना भी सही नहीं होगा। यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है कि गिरफ्तार व्यक्ति को नेटवर्क की कितनी जानकारी थी, उसकी भूमिका क्या थी और उसके पीछे कौन लोग काम कर रहे थे। फिलहाल समस्तीपुर, पटना और मोतिहारी के मामलों ने बिहार में शराब तस्करी के बदलते तौर-तरीकों पर बहस जरूर तेज कर दी है। असली सवाल यही है—क्या पुलिस सिर्फ शराब लेकर जा रहे कैरियर तक पहुंचेगी या इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक भी पहुंच पाएगी?आखिर शराब तस्करों ने क्यों बदला तरीका?
समस्तीपुर में AC फर्स्ट क्लास से 75 लीटर शराब
पटना में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा गिरफ्तार
मोतिहारी में 'किराये का परिवार' बनाकर शराब तस्करी
क्या ये महिलाएं मास्टरमाइंड हैं या सिर्फ मोहरा?
शराबबंदी के बावजूद तस्करी क्यों नहीं रुक रही?
महिलाओं को कैरियर बनाने के पीछे क्या है रणनीति?















