नई दिल्ली: भारत ने स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। कावा यूएवी प्राइवेट लिमिटेड के मुताबिक, भारत में विकसित अगली पीढ़ी के जेट-पावर्ड लॉइटरिंग म्यूनिशन ‘दिव्यास्त्र Mk3’ ने अपनी पहली सफल उड़ान पूरी की है। कंपनी के अनुसार, यह उड़ान 11 अगस्त 2026 को हुई।

कंपनी ने रविवार को दावा किया कि दिव्यास्त्र Mk3 भारत का पहला स्वदेशी जेट-पावर्ड लॉइटरिंग म्यूनिशन है। इसमें भारतीय एयरफ्रेम, स्वदेशी जेट इंजन और घरेलू तकनीक के साथ फायरपावर सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है।

क्या होता है लॉइटरिंग म्यूनिशन

लॉइटरिंग म्यूनिशन एक ऐसा मानवरहित हथियार सिस्टम होता है, जो लक्ष्य वाले क्षेत्र के आसपास कुछ समय तक उड़ान भर सकता है और लक्ष्य की पहचान होने के बाद उस पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

इसी वजह से इसे कई बार ‘कामिकाजी ड्रोन’ भी कहा जाता है। हालांकि, यह सामान्य निगरानी ड्रोन से अलग होता है और विशेष रूप से लक्षित हमले की भूमिका के लिए डिजाइन किया जाता है।

महज एक साल में तैयार करने का दावा

कंपनी के अनुसार, कार्यक्रम शुरू होने से पहली उड़ान तक दिव्यास्त्र Mk3 को लगभग एक साल में विकसित किया गया। इसमें इस्तेमाल होने वाला जेट इंजन भी स्वदेशी बताया गया है, जिसे DG Propulsion ने विकसित किया है।

कंपनी का दावा है कि सिस्टम में आयातित जेट इंजन का इस्तेमाल नहीं किया गया है और किसी महत्वपूर्ण विदेशी सब-सिस्टम पर निर्भरता भी नहीं रखी गई है। कंपनी के मुताबिक, सिस्टम का विकास और उड़ान परीक्षण भारत में ही किया गया।

‘यह सिर्फ टेस्ट फ्लाइट नहीं’

कावा यूएवी के सह-संस्थापकों ने इस उपलब्धि को केवल एक परीक्षण उड़ान मानने से आगे की बात बताया। उनके अनुसार, यह भारत की घरेलू तकनीकी क्षमता और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित करता है।

कंपनी का कहना है कि भारत ने कम समय में यह क्षमता दिखाई है कि वह देश के भीतर ही जेट-पावर्ड प्रिसीजन स्ट्राइक सिस्टम की परिकल्पना, इंजीनियरिंग और उड़ान परीक्षण कर सकता है।

स्वदेशी रक्षा उत्पादन के लिए अहम कदम

कंपनी ने दिव्यास्त्र Mk3 को ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। कंपनी के मुताबिक, इसकी पहली उड़ान स्वदेशी एयरोस्पेस और उन्नत मानवरहित रक्षा प्रणालियों के विकास की दिशा में एक अहम कदम है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये क्षमताएं और प्रदर्शन संबंधी दावे फिलहाल कंपनी की ओर से बताए गए हैं। सिस्टम के व्यापक सैन्य उपयोग, परीक्षण और आधिकारिक स्वीकृति से जुड़ी जानकारी अलग प्रक्रिया के तहत सामने आएगी।