तिसरी-गांवा में ढिबरा कारोबार पर कब लगेगी लगाम? वन विभाग ने पिकअप जब्त किया, चालक फरार
तिसरी: गिरिडीह के तिसरी और गांवा क्षेत्र में ढिबरा और पत्थरों के कथित अवैध कारोबार को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। गांवा वन विभाग की टीम ने रविवार रात ढिबरा लदा एक पिकअप वैन जब्त किया। बताया जा रहा है कि वाहन तिसरी के गड़कुड़ा इलाके से ढिबरा लेकर डोमचांच की ओर जा रहा था। कार्रवाई के दौरान चालक फरार हो गया। वाहन जब्त होने के बावजूद क्षेत्र में इस कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने की चुनौती बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, गुप्त सूचना मिलने के बाद गांवा के वन क्षेत्र पदाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने टीम के साथ कार्रवाई की। टीम ने घंघरीकूरा से आगे कन्हैय मोड़ के पास पिकअप वैन को पकड़ लिया। वाहन का नंबर JH10CM9671 बताया गया है। वन विभाग ने पिकअप को जब्त कर गांवा बिट कार्यालय पहुंचा दिया, जबकि चालक मौके से भाग निकला। इस कार्रवाई के बाद अब वाहन के मालिक और ढिबरा के स्रोत का पता लगाना अहम होगा, ताकि परिवहन के पीछे शामिल लोगों की पहचान की जा सके। तिसरी प्रखंड के असुरहड्डी, चरकी, ढिबरी पहाड़ी, करमा पहाड़ी और मुखबली सहित कई वन क्षेत्रों में सफेद क्वार्ट्ज और अन्य पत्थरों के कथित संग्रहण, खनन तथा परिवहन की चर्चा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कुछ इलाकों से बड़े पैमाने पर पत्थर एकत्र किए जाने की बात कही जा रही है। असुरहड्डी क्षेत्र में रात के समय बैरल पत्थर निकाले जाने की भी चर्चा है। हालांकि, इन गतिविधियों की वास्तविक स्थिति, खनन की वैधता और इनके पीछे सक्रिय नेटवर्क की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कुछ पत्थरों को मजदूरों से करीब 50 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदे जाने और आगे लगभग 70 रुपये प्रति किलो तक बेचे जाने की बात कही जा रही है। उच्च गुणवत्ता वाले क्वार्ट्ज पत्थरों की कीमत अधिक होने की भी चर्चा है। बताया जाता है कि पत्थरों को पिकअप वैन और दूसरे वाहनों से विभिन्न स्थानों तक पहुंचाया जाता है। हालांकि, खरीद-बिक्री की दरों, कारोबार की मात्रा और परिवहन नेटवर्क के संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय सूत्रों ने ढिबरा और पत्थरों के संग्रहण में महिलाओं तथा किशोरों को लगाए जाने का आरोप लगाया है। नारोंटांड़, मुखबली, सेवाटांड़, लोकाय, मनसाडीह, पचरुखी, महुआटांड़, सेवाढाव और खिड़कियां मोड़ सहित कई इलाकों में ढिबरा के कथित संग्रहण और खरीद-बिक्री की गतिविधियां जारी रहने की बात कही जा रही है। कुछ व्यापारियों द्वारा किराये के कमरों में ढिबरा जमा करने और रात में वाहनों से तिलैया-डोमचांच या गिरिडीह की ओर भेजने के आरोप भी सामने आए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) की टीम की गतिविधियों के दौरान असुरहड्डी क्षेत्र में पत्थरों से जुड़ी गतिविधियां कुछ समय के लिए प्रभावित हुई थीं। लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि टीम के लौटने के बाद रात में पत्थरों के संग्रहण और परिवहन की गतिविधियां फिर शुरू हो गईं। इस जानकारी की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लगातार सामने आ रही सूचनाओं के बीच वन क्षेत्रों में निगरानी, परिवहन की जांच और कारोबार में शामिल लोगों तक पहुंचने की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। हालिया मामले में वाहन जब्त हुआ, लेकिन चालक के फरार होने से जांच की चुनौती बढ़ गई है। यदि वन क्षेत्रों से अवैध खनन या वन संपदा का दोहन हो रहा है, तो इसकी पुष्टि के लिए स्थल जांच, जब्त सामग्री की पहचान और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच जरूरी होगी। तिसरी के रेंजर अनिल कुमार ने कहा कि पत्थर और ढिबरा के अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और आगे भी यह अभियान जारी रहेगा। अब निगाह इस बात पर है कि वन विभाग जब्त पिकअप के मामले में वाहन मालिक और कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर पाता है या नहीं। साथ ही, क्षेत्र में पत्थरों और ढिबरा के कथित अवैध संग्रहण तथा परिवहन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।गुप्त सूचना पर कार्रवाई, वाहन जब्त
कई वन क्षेत्रों से पत्थरों के संग्रहण की चर्चा
50 रुपये किलो खरीद, 70 रुपये तक बिक्री की चर्चा
महिलाओं और किशोरों से संग्रहण कराने का आरोप
जीएसआई सर्वे के बाद गतिविधियां बढ़ने की चर्चा
वन विभाग की निगरानी पर सवाल
रेंजर बोले- कार्रवाई जारी रहेगी















