महिला किसानों के लिए झारखंड सरकार की बड़ी पहल, जल्द शुरू होगी ‘महिला किसान खुशहाल योजना’; 5 जिलों से होगी शुरुआत
रांची: झारखंड सरकार राज्य की महिला किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से ‘महिला किसान खुशहाल योजना’ शुरू करने की तैयारी में है। योजना की शुरुआत में राज्य के पांच जिलों को शामिल किया गया है। प्रत्येक जिले से 70 महिला किसानों का चयन किया जाएगा। इसी योजना को लेकर रांची में राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, विभिन्न गैर सरकारी संगठनों (NGOs) के प्रतिनिधि और किसान प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यशाला में योजना की रूपरेखा, लाभार्थियों के चयन और महिला किसानों के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। ‘महिला किसान खुशहाल योजना’ के तहत किसानों को इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम (IFS) मॉडल से जोड़े जाने की योजना है। इसके माध्यम से खेती के साथ अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को जोड़कर किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। योजना के तहत पात्र किसानों को ₹7 लाख तक की वित्तीय सहायता और सब्सिडी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य महिला किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर आधुनिक और अधिक लाभकारी कृषि व्यवस्था से जोड़ना है। योजना के लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया को प्रभावी और व्यावहारिक बनाने के लिए किसानों से भी सुझाव लिए जा रहे हैं। राज्य स्तरीय कार्यशाला में महिला किसानों और किसान प्रतिनिधियों से उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को लेकर राय ली गई। सरकार का जोर ऐसी चयन प्रक्रिया तैयार करने पर है, जिससे वास्तव में जरूरतमंद और खेती से जुड़ी महिला किसानों को योजना का लाभ मिल सके। कार्यशाला में महिला किसानों के सामने आने वाली जमीन से जुड़ी समस्याओं पर भी विशेष चर्चा हुई। बड़ी संख्या में महिला किसानों के पास स्वयं की कृषि भूमि पर्याप्त मात्रा में नहीं है, जबकि कई महिलाएं लीज या पट्टे पर जमीन लेकर खेती करती हैं। ऐसी स्थिति में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आने वाली व्यवहारिक दिक्कतों का समाधान तलाशने पर जोर दिया गया। सरकार और संबंधित संस्थाएं यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही हैं कि जमीन की उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों के कारण वास्तविक महिला किसान योजना के लाभ से वंचित न रहें। ‘महिला किसान खुशहाल योजना’ का एक प्रमुख उद्देश्य पारंपरिक खेती से जुड़े किसानों को आधुनिक, वैज्ञानिक और प्रगतिशील कृषि पद्धतियों से जोड़ना है। इसके जरिए उत्पादन बढ़ाने के साथ खेती को आय का बेहतर माध्यम बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। सरकार का मानना है कि महिला किसानों को वित्तीय सहायता, तकनीकी जानकारी और आधुनिक कृषि मॉडल से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है। योजना के शुरुआती चरण में पांच जिलों को शामिल किया गया है। हर जिले से 70 महिला किसानों का चयन किया जाएगा। इस तरह शुरुआती चरण में कुल 350 महिला किसानों को योजना से जोड़ने की तैयारी है। राज्य स्तरीय कार्यशाला में योजना को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने, लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता और महिला किसानों की वास्तविक जरूरतों को शामिल करने पर विशेष जोर दिया गया।IFS मॉडल से खेती को मिलेगा नया आधार
किसानों की राय से तय होगी चयन प्रक्रिया
जमीन की कमी और लीज पर खेती बड़ी चुनौती
पारंपरिक खेती से आधुनिक कृषि की ओर बढ़ाने की तैयारी
पांच जिलों में 70-70 महिला किसानों का चयन















