रांची/नई दिल्ली:  झारखंड में नियमित पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति का मामला बुधवार, 2 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट के सामने सुनवाई के लिए है। मामला सुप्रीम कोर्ट के चर्चित प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में तय DGP नियुक्ति प्रक्रिया के अनुपालन से जुड़ा है। कोर्ट ने पहले ही झारखंड समेत कुछ राज्यों से नियमित DGP की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को प्रस्ताव नहीं भेजे जाने को लेकर जवाब मांगा था।

18 अगस्त की सुनवाई के बाद झारखंड से संबंधित पेपरबुक एमिकस क्यूरी को उपलब्ध कराई गई थी, ताकि मामले में उनकी सहायता से अदालत के समक्ष आवश्यक पक्ष रखा जा सके। इसके बाद मामले को 2 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के केस रिकॉर्ड में भी 2 सितंबर 2026 की सुनवाई दर्ज है।

क्या है DGP नियुक्ति का पूरा विवाद?

झारखंड में DGP की नियुक्ति को लेकर मुख्य विवाद इस बात पर है कि राज्य में पुलिस प्रमुख की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किस हद तक किया गया है।

प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस सुधारों के तहत DGP की नियुक्ति के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया तय की थी। इसके तहत योग्य वरिष्ठ IPS अधिकारियों के नाम UPSC को भेजे जाते हैं। UPSC निर्धारित प्रक्रिया के तहत अधिकारियों का पैनल तैयार करता है और उसी पैनल के आधार पर राज्य में नियमित DGP की नियुक्ति की जाती है।

हाल के आदेशों में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों द्वारा नियमित DGP की नियुक्ति में देरी और UPSC को समय पर प्रस्ताव नहीं भेजने को गंभीरता से लिया है। फरवरी 2026 में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राज्यों और UPSC को नियमित DGP नियुक्ति के लिए प्रकाश सिंह मामले में निर्धारित व्यवस्था का पालन करना होगा।

झारखंड से कोर्ट ने क्यों मांगा जवाब?

सुप्रीम कोर्ट के 12 मार्च 2026 के आदेश में झारखंड और उत्तर प्रदेश को यह बताने के लिए कहा गया था कि प्रकाश सिंह फैसले के अनुरूप DGP नियुक्ति का प्रस्ताव UPSC को क्यों नहीं भेजा गया।

इसके बाद 18 अगस्त की कार्यवाही में UPSC की ओर से अदालत को बताया गया कि झारखंड में नियमित DGP की नियुक्ति के लिए उसका प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ था। झारखंड से संबंधित पेपरबुक एमिकस क्यूरी को उपलब्ध कराई गई और मामले को आगे की सुनवाई के लिए 2 सितंबर को सूचीबद्ध किया गया।

राज्य सरकार की अपनी DGP नियमावली भी सवालों के घेरे में

विवाद का एक अहम पहलू झारखंड सरकार द्वारा DGP की नियुक्ति के लिए बनाई गई अपनी नियमावली भी है। राज्य सरकार का पक्ष रहा है कि प्रशासनिक परिस्थितियों और UPSC प्रक्रिया में देरी के कारण राज्य में DGP नियुक्ति से जुड़ी व्यवस्था के लिए नियम बनाए गए।

2 सितंबर को होने वाली सुनवाई में इस बात पर भी नजर रहेगी कि राज्य की व्यवस्था प्रकाश सिंह फैसले में निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप है या नहीं।

हालिया उपलब्ध जानकारी के अनुसार झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दाखिल अनुपालन हलफनामे में DGP नियुक्ति नियमावली 2025 और UPSC के साथ हुए पत्राचार का भी उल्लेख किया है। सरकार ने अपनी ओर से नियुक्ति प्रक्रिया और परिस्थितियों का पक्ष अदालत के सामने रखा है।

अनुराग गुप्ता की नियुक्ति और रिटायरमेंट के बाद कार्यकाल का मुद्दा

DGP विवाद में पूर्व DGP अनुराग गुप्ता की नियुक्ति और सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें पद पर बनाए रखने का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहा है।

केंद्र सरकार ने उनकी सेवानिवृत्ति के बाद कार्यकाल बढ़ाए जाने के राज्य सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई थी। केंद्र की ओर से इस व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट के DGP नियुक्ति संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं बताया गया था। दूसरी ओर, झारखंड सरकार ने अपनी नियमावली और प्रशासनिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपना पक्ष रखा।

बाबूलाल मरांडी की याचिका से भी जुड़ा है मामला

झारखंड में DGP नियुक्ति को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में राज्य की नियुक्ति प्रक्रिया और UPSC की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि राज्य सरकार ने UPSC की निर्धारित प्रक्रिया से अलग व्यवस्था बनाकर सेवानिवृत्त अधिकारी को DGP पद पर बनाए रखने का रास्ता तैयार किया। इन आरोपों पर राज्य सरकार का अपना पक्ष है और अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट को करना है।

आज की सुनवाई पर टिकी निगाहें

अब 2 सितंबर की सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अदालत के सामने झारखंड में नियमित DGP की नियुक्ति, UPSC को प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया और राज्य की अपनी नियमावली से जुड़े सवाल मौजूद हैं।

सुप्रीम कोर्ट पहले ही राज्यों को नियमित DGP की नियुक्ति में देरी से बचने और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दे चुका है। ऐसे में आज की सुनवाई में अदालत की ओर से आने वाली टिप्पणी या निर्देश झारखंड में पुलिस प्रमुख की नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।