जामताड़ा के दक्षिणबहाल में चला खेत बचाओ अभियान, 40 किसानों को जैविक खेती, मिट्टी जांच और जल संरक्षण की दी गई जानकारी
जामताड़ा जिले के जामताड़ा प्रखंड अंतर्गत दक्षिणबहाल गांव में शुक्रवार को खेत बचाओ अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, जैविक खेती को बढ़ावा देने, संतुलित मात्रा में रासायनिक खाद का इस्तेमाल करने और जल संरक्षण के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में करीब 40 किसानों ने भाग लिया। पूरे कार्यक्रम का संचालन बीटीएम मो. इकबाल हुसैन ने किया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को बताया गया कि लगातार असंतुलित मात्रा में रासायनिक खाद का इस्तेमाल करने से मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता प्रभावित हो सकती है। इसलिए खेतों की मिट्टी की नियमित जांच कराना जरूरी है। मिट्टी जांच से यह पता चलता है कि जमीन में किन पोषक तत्वों की कमी है और कौन-से तत्व पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर फसल की जरूरत के अनुसार खाद एवं उर्वरकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे अनावश्यक खर्च कम करने के साथ मिट्टी की सेहत को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलती है। किसानों को पारंपरिक खेती के उपयोगी तरीकों को अपनाने के साथ जैविक खेती की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया। उन्हें बताया गया कि गोबर की खाद, कंपोस्ट और अन्य जैविक खादों का उचित इस्तेमाल मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने में सहायक होता है। इससे मिट्टी की संरचना और पानी धारण करने की क्षमता में सुधार हो सकता है। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि बेहतर उत्पादन के लिए केवल जैविक खाद पर निर्भर रहने के बजाय मिट्टी जांच के परिणाम और फसल की आवश्यकता के अनुसार संतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए। किसानों को बिना उचित जानकारी के खाद का प्रयोग करने से बचने और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की सलाह दी गई। खेत बचाओ अभियान के तहत जल संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया। किसानों को बताया गया कि ड्रिप सिंचाई तकनीक के माध्यम से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जा सकता है। इससे पानी की बर्बादी कम करने और फसलों को जरूरत के अनुसार नमी उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। कार्यक्रम में बताया गया कि ड्रिप सिंचाई से पानी की खपत में काफी कमी आ सकती है। कुछ परिस्थितियों में पानी की बचत 90 प्रतिशत तक होने का दावा किया जाता है, हालांकि वास्तविक बचत फसल, मिट्टी, मौसम और सिंचाई व्यवस्था पर निर्भर करती है। इस तकनीक से सिंचाई में लगने वाले श्रम और खर्च को कम करने में भी मदद मिल सकती है। बीटीएम मो. इकबाल हुसैन ने किसानों को जैविक कीटनाशक और जैविक फफूंदनाशक के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने फसलों में कीटों और रोगों की समय पर पहचान करने तथा उनके नियंत्रण के लिए उचित उपाय अपनाने की जानकारी दी। किसानों को सलाह दी गई कि फसल की स्थिति और कीटों के प्रकोप के अनुसार ही नियंत्रण के तरीके अपनाएं। जैविक उपायों और एकीकृत कीट प्रबंधन को बढ़ावा देने से खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है। साथ ही, रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करते समय निर्धारित मात्रा और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने पर भी जोर दिया गया। खेत बचाओ अभियान का उद्देश्य किसानों को ऐसी कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना है, जिनसे मिट्टी की उर्वरता बनी रहे, पानी का बेहतर उपयोग हो और खेती की लागत कम की जा सके। दक्षिणबहाल में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। उम्मीद है कि मिट्टी जांच, संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खेती और आधुनिक सिंचाई तकनीकों की जानकारी से किसानों को उत्पादन बेहतर बनाने तथा आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।मिट्टी की जांच के बाद ही करें खाद का इस्तेमाल
जैविक खाद और संतुलित उर्वरकों के इस्तेमाल पर जोर
ड्रिप सिंचाई से पानी और लागत बचाने की जानकारी
जैविक कीटनाशक और फफूंदनाशक के बारे में दी जानकारी
किसानों की आमदनी बढ़ाने और मिट्टी बचाने का लक्ष्य















