गिरिडीह: जिले के तिसरी प्रखंड स्थित कुर्चांचो गांव में सैकड़ों यूकेलिप्टस पेड़ों की कटाई को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निजी जमीन के नाम पर वन विभाग की भूमि पर खड़े पेड़ों की भी कटाई कर दी गई। मामले ने वन भूमि और निजी भूमि की सीमांकन प्रक्रिया, विभागीय निगरानी और नापी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की ओर से कटाई पर रोक लगाए जाने के बावजूद रातभर पेड़ों की कटाई जारी रही। उनका आरोप है कि काटे गए पेड़ों की लकड़ियों को ट्रकों के माध्यम से बाहर भी भेज दिया गया। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, वन विभाग के कर्मी शशि कुमार ने ग्रामीणों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पेड़ों की कटाई रोकने का निर्देश पहले ही दिया जा चुका था। उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस बीच निजी अमीन के अलग-अलग बयानों ने भी विवाद को और गहरा दिया है। भूमि की वास्तविक स्थिति और सीमांकन को लेकर उठ रहे सवालों के कारण मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

उधर गावां वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी अनिल कुमार ने कहा कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। यदि जांच में वन भूमि पर अवैध कटाई या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

कुर्चांचो की यह घटना वन संरक्षण, पौधारोपण अभियानों और वन संपदा की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और जांच रिपोर्ट के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।