कोडरमा: कोडरमा जिले के डोमचांच नगर पंचायत क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालय को तोड़े जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2018-19 में विधायक निधि से बने शौचालय को वर्ष 2026 में ध्वस्त कर दिया गया, जबकि वह इस्तेमाल के लायक था। इस कार्रवाई के बाद निर्माण की गुणवत्ता और सरकारी पैसे के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, नगर पंचायत के उपाध्यक्ष आदर्श कुमार पंकज का कहना है कि शौचालय की स्थिति जर्जर हो चुकी थी, जिसके कारण उसे तोड़ने का फैसला लिया गया। उन्होंने यहां जल्द आधुनिक शौचालय बनवाने का आश्वासन दिया है। दूसरी ओर, पूर्व उपाध्यक्ष पप्पू मेहता ने भी निर्माण की गुणवत्ता और शौचालय तोड़ने के फैसले की जांच की मांग की है।

डोमचांच नगर पंचायत क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालय को ध्वस्त किए जाने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2018-19 में विधायक निधि से इस शौचालय का निर्माण कराया गया था, जिसे नगर प्रशासन ने वर्ष 2026 में तोड़ दिया। इसके बाद शौचालय की निर्माण गुणवत्ता, सरकारी राशि के इस्तेमाल और इसे ध्वस्त करने के फैसले पर सवाल उठने लगे हैं।

शौचालय तोड़े जाने से नाराज ग्रामीण, जांच की मांग

स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि सार्वजनिक शौचालय इस्तेमाल के लायक था और इसे तोड़ने की जरूरत नहीं थी। उनका आरोप है कि सरकारी पैसे से बने इस ढांचे को कुछ ही वर्षों में ध्वस्त कर दिया गया, जिससे सरकारी राशि के उचित इस्तेमाल पर सवाल खड़े होते हैं।

ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि शौचालय को किस आधार पर तोड़ा गया और निर्माण कार्य में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता कैसी थी।

नगर पंचायत उपाध्यक्ष ने दी सफाई

नगर पंचायत के उपाध्यक्ष आदर्श कुमार पंकज ने शौचालय तोड़ने के फैसले पर सफाई देते हुए कहा कि उसकी स्थिति जर्जर हो चुकी थी और लोगों को परेशानी हो रही थी। इसी वजह से उसे ध्वस्त किया गया।

उन्होंने आश्वासन दिया कि संबंधित स्थान पर जल्द ही आधुनिक सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया जाएगा, ताकि स्थानीय लोगों को सुविधा मिल सके।

पूर्व उपाध्यक्ष ने भी उठाए सवाल

नगर पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष पप्पू मेहता ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018-19 में बना शौचालय महज आठ से नौ वर्षों में जर्जर कैसे हो गया? उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता और शौचालय को तोड़ने के निर्णय की जांच कराने की मांग की है।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति

फिलहाल, सार्वजनिक शौचालय को तोड़े जाने के मामले में ग्रामीणों के आरोपों और निर्माण की गुणवत्ता से जुड़े सवालों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। एक ओर स्थानीय लोग जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं नगर पंचायत उपाध्यक्ष ने शौचालय की जर्जर स्थिति को तोड़ने की वजह बताया है।