देवघर: झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा और गौरवशाली इतिहास को समर्पित झारखंड आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को देवघर के शिवलोक परिसर में भव्य महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। इस दौरान आदिवासी समाज के अधिकारों, संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक उत्थान को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

कार्यक्रम में जिला प्रधान एवं सत्र न्यायाधीश कौशल किशोर झा, पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख, उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया, उप विकास आयुक्त पीयूष सिन्हा, अनुमंडल पदाधिकारी रवि कुमार, नगर आयुक्त सुलोचना मीणा समेत कई वरीय पदाधिकारी मौजूद रहे। वहीं झामुमो जिलाध्यक्ष संजय शर्मा सहित पार्टी के कई कार्यकर्ता भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

जल, जंगल और जमीनआदिवासी समाज की पहचान

महोत्सव के दौरान आदिवासी समाज के पारंपरिक अधिकारों और उनकी पहचान से जुड़े जल, जंगल और जमीन के मुद्दे पर विशेष चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि जल, जंगल और जमीन केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं हैं, बल्कि आदिवासी समाज की जीवनशैली, संस्कृति और अस्तित्व का अभिन्न हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ आदिवासी समुदाय के अधिकारों को सुरक्षित रखना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर भी हुई चर्चा

कार्यक्रम में आदिवासी समाज के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्वरोजगार, आवास, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सशक्तीकरण से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

इतिहास पुरुषों और जनजातीय नायकों को किया याद

कार्यक्रम के दौरान झारखंड के निर्माण और आदिवासी समाज के अधिकारों की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इतिहास पुरुषों एवं जनजातीय नायकों को श्रद्धापूर्वक याद किया गया।

वक्ताओं ने कहा कि झारखंड की पहचान यहां की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और संघर्षों से बनी है। नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना बेहद जरूरी है।

महोत्सव में आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने तथा उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि विकास के साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं को बचाकर रखना ही वास्तविक प्रगति है।

पौधा, शॉल और मोमेंटो देकर किया सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए अतिथियों और अधिकारियों को पौधा, शॉल और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। पौधा भेंट कर लोगों को अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने और प्रकृति के संरक्षण का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने आदिवासी समाज के सम्मान, अधिकारों और विकास के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करने का संकल्प लिया। शिवलोक परिसर में आयोजित यह महोत्सव आदिवासी संस्कृति, प्रकृति संरक्षण और सामाजिक सरोकारों के प्रति जागरूकता का संदेश देते हुए संपन्न हुआ।