चांडिल डैम विस्थापितों के हक और स्थायी पुनर्वास की मांग को लेकर विस्थापित संगठनों ने एकजुट होकर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। चांडिल डैम विस्थापित समन्वय मंच के बैनर तले विस्थापित गांवों में चलाया जा रहा जनसंवाद और जनजागरण अभियान का पहला चरण पूरा हो चुका है। अब 7 सितंबर से दूसरे चरण की शुरुआत की जाएगी।विस्थापित संगठनों का कहना है कि डैम निर्माण के करीब 44 वर्ष बाद भी पुनर्वास और मुआवजे से जुड़े कई वादे अधूरे हैं। मंच की ओर से कुल 116 विस्थापित गांवों और 13 पुनर्वास स्थलों तक जनजागरण अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है।

20 गांवों में हुआ जनसंवाद

विस्थापित समिति के अध्यक्ष नारायण गोप ने बताया कि 25 से 27 अगस्त तक चले अभियान के पहले चरण में 20 विस्थापित गांवों में जनसंवाद किया गया। इसके बाद समीक्षा बैठक कर बाकी विस्थापित गांवों और पुनर्वास स्थलों तक अभियान पहुंचाने की रणनीति तैयार की गई।नारायण गोप ने कहा कि करीब 40 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद 2003 और 2012 की पुनर्वास नीति में संशोधन तो किया गया, लेकिन सरकार की ओर से इसे पूरी तरह धरातल पर लागू नहीं किया गया। उन्होंने सरकार द्वारा घोषित विस्थापित एवं पुनर्वास आयोग को जल्द से जल्द जमीनी स्तर पर लागू करने की मांग की।

 पूरी कृषि भूमि डूब चुकी है, गांवों को पूर्ण डूबी क्षेत्र घोषित करें

समन्वय मंच के सचिव श्यामल मार्डी ने बताया कि विभिन्न विस्थापित संगठनों को एक मंच पर लाकर हुडलुंग से हाड़ात गांव तक संवाद यात्रा निकाली गई। उन्होंने दावा किया कि संवाद यात्रा को ग्रामीणों का व्यापक समर्थन मिला।श्यामल मार्डी ने कहा कि चांडिल डैम के कारण कई गांवों की पूरी कृषि भूमि डूब चुकी है। ऐसे गांवों को पूर्ण डूबी क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 44 वर्ष बीत जाने के बावजूद पुनर्वास स्थलों पर बसे कई लोगों की जमीन अब तक राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं है। विस्थापित परिवारों को जाति, आय और आवासीय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पुराने दस्तावेजों के सिलसिले में आज भी चाईबासा के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

180 RL जलस्तर को लेकर उठे सवाल

चांडिल डैम के बढ़ते जलस्तर को लेकर विस्थापित नेता राकेश रंजन महतो ने आपदा प्रबंधन और जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।उन्होंने कहा कि डैम का जलस्तर बढ़ने से आसपास के विस्थापित गांवों में पानी घुसने का खतरा बढ़ जाता है। इससे जान-माल के नुकसान की आशंका बनी रहती है। उन्होंने 180 RL तक जलस्तर रखने को लेकर भी चिंता जताई।राकेश रंजन महतो के अनुसार, जिन गांवों के 180 RL तक प्रभावित होने की संभावना है, वहां के विस्थापित परिवारों को अब तक संपूर्ण मुआवजा और पुनर्वास का अधिकार नहीं मिला है। कई परिवारों की विकास पुस्तिका नहीं बनी है, अनुदान राशि लंबित है, पात्र लोगों को नौकरी नहीं मिली है और कई परिवारों को अब तक पुनर्वास स्थलों पर व्यवस्थित रूप से नहीं बसाया गया है।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विभाग की ओर से समस्याओं का समाधान नहीं किया गया और हठधर्मी रवैया जारी रहा तो विस्थापितों का जनसैलाब बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। उन्होंने विभाग के खिलाफ बड़े जनआंदोलन की चेतावनी दी।

7 सितंबर से आंदोलन का दूसरा चरण

चांडिल डैम विस्थापित समन्वय मंच ने स्पष्ट किया है कि 7 सितंबर से जनजागरण अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत होगी। मंच का उद्देश्य विस्थापित गांवों और पुनर्वास स्थलों के लोगों को एकजुट कर उनकी समस्याओं और मांगों को सरकार के सामने मजबूती से रखना है।विस्थापित संगठनों ने सरकार से स्थायी पुनर्वास, लंबित मुआवजे का भुगतान, पुनर्वास स्थलों की समस्याओं का समाधान और विस्थापितों के अधिकारों को सुनिश्चित करने की मांग की है।