नई दिल्ली: दुबई से गिरफ्तार किए गए कथित ड्रग सिंडिकेट के सदस्य विरेंद्र सिंह बसोया की कहानी जांच एजेंसियों के मुताबिक करीब दो दशक पुराने तस्करी नेटवर्क से जुड़ी है। बताया जा रहा है कि बसोया ने अपने कथित आपराधिक सफर की शुरुआत सिगरेट और गुटखे की तस्करी से की थी और बाद में ड्रग्स के बड़े नेटवर्क में शामिल हो गया।

जांच एजेंसियों के अनुसार, बसोया भारत में ड्रग्स की कथित सप्लाई और विदेशों तक नेटवर्क फैलाने वाले सिंडिकेट की अहम कड़ी बन गया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद एजेंसियां अब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पूरे तंत्र की पड़ताल में जुटी हैं।

2006 में सिगरेट-गुटखे की तस्करी से शुरुआत

सूत्रों के मुताबिक, बसोया ने साल 2006 में स्मगलिंग की दुनिया में कदम रखा। शुरुआत में वह सिगरेट और गुटखे की कथित तस्करी करता था।

करीब तीन साल बाद, 2009 में डीआरआई (DRI) ने उसे ड्रग्स से जुड़े एक मामले में पहली बार गिरफ्तार किया। जेल से बाहर आने के बाद उसने कुछ समय तक ड्रग्स की दुनिया से दूरी बनाए रखी और कंस्ट्रक्शन समेत अलग-अलग कारोबार शुरू किए।

बाद में उसने इंपोर्ट-एक्सपोर्ट कंपनी भी शुरू की। 2009 से 2023 तक उसका नाम किसी बड़े ड्रग मामले में सामने नहीं आया।

2024 में फिर जांच एजेंसियों के रडार पर आया

जांच एजेंसियों के मुताबिक, साल 2024 में ड्रग्स की दो बड़ी बरामदगी से जुड़े मामलों की जांच के दौरान बसोया का नाम फिर सामने आया।

पुणे ड्रग्स केस में सामने आया नाम

फरवरी 2024 में पुणे में कथित तौर पर करीब 6,000 करोड़ रुपये की ड्रग्स बरामदगी के मामले की जांच के दौरान बसोया का नाम सामने आया। इसके बाद वह भारत से निकलकर दुबई चला गया और वहीं रहने लगा।

इसके बाद अक्टूबर 2024 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के एक बड़े ऑपरेशन से जुड़े मामले में भी उसका नाम सामने आया। इस मामले में करीब 13,000 करोड़ रुपये की ड्रग्स बरामदगी की बात सामने आई थी।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि दोनों मामलों में बसोया की भूमिका महत्वपूर्ण थी।

दुबई से गिरफ्तारी के बाद मुंबई ले जाने की तैयारी

दुबई से भारत लाए जाने के बाद बसोया को अदालत में पेश किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, NCB की मुंबई टीम पुणे ड्रग्स मामले की जांच कर रही है और आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर मुंबई ले जाने की तैयारी की जा रही है।

मुंबई में उससे कथित ड्रग नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और विदेशों में बैठे नेटवर्क से जुड़े लोगों को लेकर पूछताछ की जा सकती है।

पुणे और दिल्ली के मामलों में कई गिरफ्तारियां

पुणे के ड्रग्स मामले में अब तक 16 आरोपियों की गिरफ्तारी की बात सामने आई है। वहीं दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल से जुड़े ड्रग्स मामले में 20 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन मामलों के तार भारत के बाहर बैठे कथित ड्रग तस्करों और उनके नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं।

क्या है NCB का 'ऑपरेशन ग्लोबल हंट'?

विदेशों में छिपे बड़े ड्रग तस्करों और अपराधियों को भारत लाने के लिए NCB के 'ऑपरेशन ग्लोबल हंट' पर भी फोकस बढ़ा है। सूत्रों के मुताबिक इस अभियान में करीब 25 बड़े अपराधियों के नाम शामिल हैं।

इनमें से अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर भारत लाए जाने की जानकारी सामने आई है। एजेंसियों का लक्ष्य विदेशों में बैठकर भारत में कथित ड्रग नेटवर्क संचालित करने वाले सरगनाओं और उनके सहयोगियों तक पहुंचना है।

देश में ड्रग्स बनाने वाली फैक्ट्रियों पर भी कार्रवाई

NCB के अनुसार, इस साल देशभर में ड्रग्स बनाने वाली 52 फैक्ट्रियों का पता लगाया गया है। इनमें राजस्थान और मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा फैक्ट्रियां पकड़े जाने की बात सामने आई है।

जांच एजेंसियों का फोकस अब केवल ड्रग्स की खेप पकड़ने तक सीमित नहीं है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित ड्रग्स नेटवर्क में नशीले पदार्थ कहां तैयार किए जा रहे हैं, पैसा कौन लगा रहा है, सप्लाई कौन संभाल रहा है और विदेशों से नेटवर्क को कौन संचालित कर रहा है।

ड्रग नेटवर्क की जांच में अब अगली कड़ी क्या?

विरेंद्र बसोया की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी तक पहुंचना है। उसके संपर्कों, वित्तीय लेनदेन और भारत-विदेश के बीच सक्रिय नेटवर्क की जांच से इस मामले में आगे कई और नाम सामने आने की संभावना है।