रांची:  झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह के नाम पर छात्रों से 2,100 रुपये शुल्क लिए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। शुल्क बढ़ोतरी के विरोध में आजसू छात्र संघ के नेतृत्व में विद्यार्थियों ने गुरुवार को विश्वविद्यालय के मुख्य गेट के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए रांची जिला प्रशासन और पुलिस की बड़ी संख्या में तैनाती की गई थी।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और बढ़ा हुआ दीक्षांत शुल्क तत्काल वापस लेने की मांग की। छात्रों का कहना है कि पहले दीक्षांत समारोह के लिए महज 300 से 600 रुपये तक शुल्क लिया जाता था, लेकिन अब अचानक इसे बढ़ाकर 2,100 रुपये कर दिया गया है। विद्यार्थियों ने इस बढ़ोतरी को छात्र हित के खिलाफ बताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

पहले से शुल्क का बोझ, अब दीक्षांत के नाम पर अतिरिक्त वसूली का आरोप

छात्रों का आरोप है कि सीएलसी (CLC) और माइग्रेशन के नाम पर पहले ही करीब 900 रुपये शुल्क लिया जा रहा है। इसके बाद दीक्षांत समारोह के लिए 2,100 रुपये की अतिरिक्त राशि निर्धारित करना विद्यार्थियों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला फैसला है।

आजसू छात्र संघ ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को कोई भी शुल्क निर्धारित करने से पहले छात्रों की आर्थिक स्थिति और उनके हितों को ध्यान में रखना चाहिए। संघ ने स्पष्ट किया कि यदि शुल्क बढ़ोतरी वापस नहीं ली गई तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।

शिक्षा और नियुक्ति व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

प्रदर्शन के दौरान आजसू छात्र संघ ने केवल दीक्षांत शुल्क का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि विश्वविद्यालय की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली, छात्रवृत्ति और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी सरकार से गंभीरता से हस्तक्षेप करने की मांग की।

छात्र संघ ने विश्वविद्यालय में शिक्षकों की योग्यता और नियुक्ति प्रक्रिया की जांच कराने की मांग भी उठाई। संघ का कहना है कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था और नियुक्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है।

सरकार से हस्तक्षेप की मांग

आजसू छात्र संघ ने झारखंड सरकार से पूरे मामले को गंभीरता से लेने और विद्यार्थियों पर पड़ रहे अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम करने की मांग की। छात्रों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में शुल्क निर्धारण पारदर्शी और छात्रहित में होना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से 2,100 रुपये के दीक्षांत शुल्क को तत्काल कम करने की मांग की। छात्रों का कहना है कि जब पहले इसी समारोह के लिए काफी कम राशि ली जाती थी, तो अचानक इतनी बड़ी बढ़ोतरी का आधार सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

मुख्य मांगें:

  • दीक्षांत समारोह का 2,100 रुपये शुल्क वापस लिया जाए।
  • सीएलसी और माइग्रेशन शुल्क की समीक्षा की जाए।
  • विश्वविद्यालय की शिक्षा एवं परीक्षा व्यवस्था में सुधार हो।
  • छात्रवृत्ति व्यवस्था को बेहतर किया जाए।
  • शिक्षकों की योग्यता और नियुक्ति प्रक्रिया की जांच हो।
  • छात्रों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न डाला जाए।