रांची:  झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन सोमवार को और तेज हो गया। हजारों छात्र-अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा की ओर मार्च किया। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने छात्रों के आंदोलन का खुलकर समर्थन करते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला।

चंपई सोरेन ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि झारखंड हूल और संघर्ष की धरती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य के पूर्वजों ने अंग्रेजी हुकूमत के सामने घुटने नहीं टेके, तो आज अपने अधिकार और भविष्य के लिए आंदोलन कर रहे छात्रों को पुलिस के जरिए रोकने की कोशिश क्यों की जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों के बीच गंभीर सवाल हैं और वे इन मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। चंपई सोरेन ने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं तो उनकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

छात्रों की मांगों को लेकर विधानसभा मार्च

JPSC-JSSC मामले में आंदोलन कर रहे छात्रों ने सोमवार को विधानसभा घेराव का आह्वान किया था। छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से निकलकर विधानसभा की ओर बढ़े। प्रशासन की ओर से मार्च को रोकने के लिए कई स्तरों पर बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।

प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर छात्रों ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस की ओर से वाटर कैनन और लाठीचार्ज किए जाने की जानकारी सामने आई। घटनाक्रम के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी सूचना है।

छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है। आंदोलनकारी लगातार JPSC-JSSC की विवादित परीक्षाओं की जांच और आवश्यकतानुसार उन्हें रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

‘CBI जांच से पीछे क्यों हट रही सरकार?’

छात्रों की सबसे प्रमुख मांगों में JPSC-JSSC से जुड़े विवादों की CBI जांच शामिल है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि जब भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और कई स्तरों पर जांच की जरूरत महसूस हो रही है, तो सरकार को स्वतंत्र केंद्रीय जांच की मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

चंपई सोरेन ने भी सरकार से छात्रों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को केवल प्रशासनिक कार्रवाई या बल प्रयोग के जरिए नहीं सुलझाया जा सकता।

लंबे समय से जारी है छात्र आंदोलन

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब व्यापक रूप ले चुका है। पिछले कई दिनों से छात्र धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। अलग-अलग छात्र संगठनों की ओर से भी आंदोलन को समर्थन दिया जा रहा है।

छात्रों की मांगों को लेकर सरकार की ओर से विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों के साथ बातचीत भी की गई है। सरकार का कहना है कि कई मांगों पर सकारात्मक कदम उठाए गए हैं, जबकि आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगों पर अभी ठोस निर्णय नहीं हुआ है।

चंपई सोरेन के बयान से बढ़ा राजनीतिक दबाव

छात्र आंदोलन के बीच चंपई सोरेन का बयान सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है। उन्होंने साफ संकेत दिया कि युवाओं के आंदोलन को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानकर नहीं देखा जाना चाहिए।

अब सवाल यह है कि विधानसभा मार्च और आंदोलन के बाद सरकार छात्रों की मांगों पर क्या अगला कदम उठाती है। क्या सरकार और छात्रों के बीच बातचीत से समाधान निकलेगा या आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप लेगा—इस पर सबकी नजर बनी हुई है।